हिंदी विश्वविद्यालय की पहल के बाद अब अच्छे लेखकों की तलाश शुरू, चिकित्सा विज्ञान की करीब 300 पाठ्यसामग्री हिंदी में खोजी।
भोपाल।अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय(Atal Bihari Vajpayee Vishwavidyalaya) ने चिकित्सा विज्ञान की हिन्दी में करीब 300 सामग्री की खोज की है। इनसे हिंदी में डॉक्टरी की पढ़ाई का रास्ता खुल गया है। ये सामग्री पुस्तकों, शोध लेखों और वेबसाइटों के रूप में उपलब्ध हैं। विवि ने हिंदी में एमबीबीएस(MBBS in hindi) का पाठ्यक्रम तैयार कर लिया है। वह हिंदी को रोजी-रोटी की भाषा बनाना चाहता है।
सरल शब्दों का होगा इस्तेमाल :
विवि के चिकित्सा शिक्षा विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. विनोद भारद्वाज का कहना है कि पाठ्यसामग्री(MBBS Study will be in hindi) में सरल शब्दों का इस्तेमाल किया जाएगा। पूर्व में जो सामग्री हिंदी में अनुवाद कराई गई, उनमें संस्कृत के शब्दों की अधिकता है। इससे भाषा कठिन हो गई है।
अच्छे लेखकों की तलाश:
एमबीबीएस की किताबें हिंदी में तैयार करने के लिए विवि को अच्छे लेखकों की तलाश है। लेखकों को विवि उचित पारिश्रमिक भी देने को तैयार है।
एमसीआई के निर्देशों का पालन:
विवि भाषा अनुवाद विभाग के प्रभारी डॉ. ओम प्रकाश प्रजापति ने बताया कि पाठ्यसामग्री(MBBS Study will be in hindi) तैयार करने में विवि ने भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) के निर्देशों का पालन किया है। विभिन्न प्रश्नपत्रों के अनुसार किताबें तैयार कराई जाएंगी। इसमें कई प्रोफेसरों ने रुचि दिखाई है। किताबें हिंदी में लिखने वाले लेखक अपनी इच्छा बता सकते हैं।
मानकों पर खरा उतरने का प्रयास :
विश्वविद्यालय के अनुसार उपलब्ध माध्यमों का इस्तेमाल किताबें(MBBS Study in hindi) लिखने में किया जा सकता है। हालांकि परेशानी यह है कि ये सामग्री एमबीबीएस के मानकों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरतीं। उक्त माध्यमों को आधार मानकर लेखकों को नए सिरे से कार्य करना होगा। यही कारण है कि हिंदी विवि न सिर्फ प्रदेश से बल्कि देशभर से लेखकों को आमंत्रित कर रहा है।
एमबीबीएस की पाठ्यसामग्री हिंदी में उपलब्ध नहीं है। हिंदी में डॉक्टरी की किताबें तैयार करने के लिए विवि देशभर से हिंदी के लेखकों और अनुवादकों को आमंत्रित कर चुुका है। उनसे पारिश्रमिक दरें भी मांगी गई हैं ताकि लेखन कार्य में कोई दिक्कत न आए।
- डॉ. ओम प्रकाश प्रजापति, विवि भाषा अनुवाद विभाग के प्रभारी