राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में एक और फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है।
भोपाल@रिपोर्ट - प्रवीण श्रीवास्तव.
राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में एक और फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। जीएमसी के जिन मेडिकल ऑफिसर्स को एमसीआइ निरीक्षण के दौरान विदिशा मेडिकल कॉलेज में डेमोंस्ट्रेटर बनाकर भेजा गया था, उन्हें अब इस पद के लिए अयोग्य करार दे दिया गया है। दरअसल, 21 अप्रैल 2018 को चिकित्सा शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर चार मेडिकल ऑफिसर्स सहित 11 लोगों को विदिशा मेडिकल कॉलेज स्थानांतरित किया था।
चारों मेडिकल ऑफिसर्स को बतौर डेमोंस्ट्रेटर नियुक्त किया गया था। इन्हें 24 अप्रैल को विदिशा मेडिकल कॉलेज से रिलीव भी कर दिया गया। एमसीआइ के नियमों की अगर बात की जाए तो मेडिकल कॉलेज में मेडिकल ऑफिसर का पद नहीं होता। दो साल पहले भी जीएमसी से कुछ डेमोंस्ट्रेटर को सागर मेडिकल कॉलेज भेजने का कड़ा विरोध हुआ था।
चिकित्सा शिक्षा विभाग इमरजेंसी ड्यूटी, नाइट ड्यूटी सहित अन्य कार्यों के लिए मेडिकल ऑफिसर्स की भर्ती करता है। प्रदेश में करीब सौ मेडिकल ऑफिसर्स हैं। तीन साल बाद भी इनके भर्ती नियमनहीं बन पाए हैं। संभागायुक्त अजातशत्रु श्रीवास्तव ने कहा, भर्ती प्रक्रिया नियमों के अनुसार चल रही है। इसमें कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। लोगों को शिकायत है तो हमसे मिलें।
हाईकोर्ट पहुंचा असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती घोटाला
उधर, इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियमों को ताक में रखकर भर्ती करने का मामला अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। भर्तियों को चुनौती देते हुए सरकारी मेडिकल ऑफिसर देवकृष्ण शर्मा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। एडवोकेट मितेश जैन के माध्यम से दायर की गई याचिका पर मंगलवार को जस्टिस एससी शर्मा की कोर्ट में सुनवाई हुई।
कोर्ट ने याचिका पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, आयुक्त सहित पांच जिम्मेदारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। एडवोकेट जैन ने बताया आर्थोपेडिक सर्जन डॉक्टर देवकृष्ण जैन असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए सारी योग्यताएं रखते हैं, लेकिन जिम्मेदारों ने उनकी मार्किंग में गड़बड़ी कर उन्हें साक्षात्कार की सूची से हटा दिया है। तकनीकी पहलूओं पर सबसे योग्य होने के बावजूद उन्हें इंटरव्यू की लिस्ट में शामिल नहीं किया है।