सरकारी संस्थानों में व्यवस्थाओं की कमी का हवाला देकर नहीं आते काम करने, प्रदेश में अब भी जरूरत के आधे ही हैं डॉक्टर
भोपाल. प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों से ३500 एमबीबीएस डॉक्टर तैयार होते हैंं। ये सभी मप्र मेडिकल काउंसिल (एमपीएमसी) में रजिस्ट्रेशन भी कराते हैं, लेकिन इनमें आधे ज्वॉइन ही नहीं करते। बीते साल कोरोना काल में प्रदेश में करीब २१०० पदों पर भर्तियां निकाली गईं, लेकिन महज ९०० डॉक्टर ही ज्वॉइन करने पहुंचे। इनमें से भी कुछ ज्वॉनिंग के बाद छोड़ गए।
दरअसल निजी कॉलेजों में एमबीबीएस के लिए ५० लाख सालाना फ ीस भरने के बाद यह डॉक्टर निजी क्षेत्रों में काम करना चाहते हैं। यही स्थिति सरकारी मेडिकल कॉलेज से निकलने वाले डॉक्टरों की है। ये भी निजी अस्पतालों मंे काम करना ज्यादा बेहतर समझते हैं, यही कारण है कि गांवों में सरकारी डॉक्टर नहीं हैं।
मालूम हो कि प्रदेश में १३ सरकारी और नौ निजी मेडिकल कॉलेज हैं जहां ३४८५ एमबीबीएस सीट हैं।
जब तक सरकारी संस्थानों में व्यवस्थाएं ठीक नहीं होंगी कोई यहां काम नहीं करना चाहेगा। स्वास्थ्य विभाग में वेतन विसंगति, प्रमोशन के नियम सहित तमाम दिक्कतें सालों से चली आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों मंे हालात और भी खराब है। इन सब समस्याओं के बाद सरकारी अस्पतालों में भीड़ और असुरक्षा। जब तक आदर्श स्थिति तैयार नहीं होती तब तक यही हालात रहेंगे।
डॉ. एसके सक्सेना, पूर्व अधीक्षक जेपी अस्पताल
हम लगातार डॉक्टरों की भर्ती का प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों की स्थिति भी सुधर गई है। अब तो डॉक्टर भी आ रहे हैं। कोरोना काल मंे डॉक्टरों के साथ अस्पतालों में सुविधाओं का भी विकास हुआ है।
डॉ.़ प्रभुराम चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मप्र
निजी कॉलेजों में एक करोड़ रुपए फीस
1. सरकारी कॉलेज सामान्य सीट : 50000 टयूशन फ ीस, 3000 कॉशन मनी, 10000 हॉस्टल फीस, 1000 स्टूडेंट वेलफेयर, 10000 सिक्युरिटी डिपोजिट(प्रतिवर्ष)
2. सरकारी कॉलेज एनआरआइ फीस : 12000 डॉलर टयूशन फ ीस, 3000 डॉलर कॉशन मनी, 10000 रुपए हॉस्टल फीस, 100 डॉलर स्टूडेंट वेलफेयर, 1000 डॉलर सिक्युरिटी डिपोजिट(प्रतिवर्ष)
3. निजी मेडिकल कॉलेज सामान्य फीस : 8 से 11 लाख रुपए प्रति वर्ष, पांच लाख हॉस्टल, मेस और बस, तीन लाख अन्य
4. निजी मेडिकल कॉलेज एनआरआई फीस : 35 से 40 लाख रुपए प्रति वर्ष
कुल सरकारी मेडिकल कॉलेज-13
एमबीबीएस की सीटें- 2035
सरकारी डेंटल कॉलेज- 1
बीडीएस की सीटें- 63
निजी मेडिकल कॉलेज- 9
एमबीबीएस की सीटें- 1450