Meenakshi Pharakte - हौसलों की उड़ान: महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं गुना की मीनाक्षी फराक्टे
Meenakshi Pharakte - यह केवल एक महिला की सफलता की कहानी नहीं बल्कि उनके आत्मविश्वास, संघर्ष और संकल्प की भी जीवंत मिसाल है। गुना जिले के बमोरी ब्लॉक की मीनाक्षी फराक्टे आज महिलाओं की प्रेरणा बन चुकी हैं। राजमाता स्व-सहायता समूह की सदस्य और शिवाजी राज सीएलएफ से जुड़ा उनका सफर बहुत कठिन रहा। शुरुआत में महज 5 हजार रुपए प्रति माह की आय हुई लेकिन मीनाक्षी पीछे नहीं हटीं। धीरे धीरे कारोबार बढ़ा और अब उनकी यूनिट लाखों का सामान बेच रही है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद जब उन्हें दिल्ली में आयोजित एआई समिट में बुलाया गया तो वे हवाई जहाज़ में बैठकर गईं। यह अवसर प्राप्त करने वाली वह गांव की पहली बहू हैं।
मीनाक्षी फराक्टे उन्नत आजीविका प्रोसेसिंग केंद्र की सेंटर इंचार्ज हैं। उनके प्रोसेसिंग केंद्र में किसान दीदियों से कच्चा माल खरीदा जाता है, फिर उसे प्रोसेस कर बाजार तक पहुंचाया जाता है। मीनाक्षी बताती हैं कि उनके साथ जुड़ी समूह की महिलाएं अलग-अलग माध्यमों से कभी घर-घर जाकर, कभी दुकानों पर तो कभी आंगनवाड़ी और स्कूलों में चल रहे मध्याह्न भोजन कार्यक्रमों के जरिए बिक्री करती हैं।
हालांकि यह राह आसान नहीं थी। जब मीनाक्षी और उनकी साथी महिलाएं पहली बार दुकानों पर अपने उत्पाद बेचने गईं, तो लोगों को विश्वास ही नहीं था कि महिलाएं भी सफल मार्केटिंग कर सकती हैं। दुकानदार अक्सर सवाल करते—“क्या आप लोग समय पर सामान पहुंचा पाएंगी? क्या इतनी जिम्मेदारी निभा पाएंगी? महिला होने से उन पर संदेह भी किया जाता था। एक ही दुकान पर कई बार जाना पड़ता, बार-बार समझाना पड़ता, भरोसा दिलाना पड़ता कि वे भी गुणवत्तापूर्ण सामान समय पर दे सकती हैं।
कारोबार में हर दिन नई चुनौतियां सामने आती थीं, लेकिन मीनाक्षी और उनकी समूह की दीदियों ने कभी हार नहीं मानी। वे लगातार हर दुकान, हर घर तक पहुंचीं और अपने काम से लोगों का भरोसा जीता। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। पिछले दो वर्षों में मीनाक्षी की यूनिट ने खासी बिक्री की। यूनिट ने 70 लाख रुपए के सामान बेचे जिसमें अकेले मीनाक्षी ने ही 25 से 30 लाख रुपए तक की बिक्री की है। आय पहले महज 5 हजार रुपए मासिक थी। इसमें धीरे धीरे बढ़ोत्तरी हुई। कमाई अब 25 हजार रुपए प्रतिमाह हो गई है।
मीनाक्षी की उपलब्धियां यहीं नहीं रुकीं। दिल्ली में आयोजित एआई समिट में शामिल होने के लिए वे फ्लाइट से गई थीं। मीनाक्षी की यह पहली हवाई यात्रा थी। वे गर्व से यह बात बताती हैं। मीनाक्षी कहती हैं कि वे अपने गांव की पहली बहू हैं जिसने हवाई जहाज में सफर किया। उनका मानना है कि मार्केटिंग उतनी कठिन नहीं है, जितनी हम सोचते हैं। बस पहला कदम बढ़ाना पड़ता है। जब तक हम खुद अनुभव नहीं करेंगे तब तक डर बना रहेगा लेकिन एक बार शुरुआत कर दी, तो हम सब कुछ कर सकते हैं।
अपनी उपलब्धियों के लिए मीनाक्षी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी पूरा श्रेय देती हैं और उनके प्रति आभार जताती हैं। वे कहती हैं कि आज उन्हें जो मंच मिला है, वह इसी समर्थन का परिणाम है। उनकी कहानी बताती है कि यदि हौसले बुलंद हों तो गांव की आम महिलाएं भी आसमान छू सकती हैं।