
भोपाल। सामान्य वर्ग के पिछड़े लोगों को आर्थिक आरक्षण देने में बाबा साहब अंबेडकर की जन्म स्थली का भी अहम योगदान रहा है। क्योंकि सिफारिश करने वाले आयोग ने महू के विश्वविद्यालय की मदद ली थी।
मध्यप्रदेश के अंबेडकर नगर (महू) के डा. भीम राव अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के सहयोग से सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर दस फीसदी आरक्षण मिलने में मदद मिली है। कई दौर की कार्यशालाओं और शोध के बाद सिफारिश की गई और उसे लागू भी कर दिया गया।
मध्यप्रदेश का मिलिट्री हेड क्वार्टर आफ वार (MHOW) जिसका नाम परिवर्तित कर अंबेडकर नगर कर दिया गया है। यह शहर डा. भीम राव अंबेडकर की जन्म स्थली भी है। केंद्र सरकार की ओर से सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की कवायद में यहां के विश्वविद्यालय का बड़ा योगदान है। डा. बीआर अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर निदेशक डीके वर्मा उस तीन सदस्यीय आयोग में सलाहकार की भूमिका में थे, जिसके बाद अनारक्षित वर्ग को आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को आरक्षण का लाभ मिल सका है। यह आयोग जर जनरल (रिटायर्ड) एसआर सिन्हो के नेतृत्व में गठित हुआ था। जिसमें वर्मा के साथ ही आईएएस अफसर महेंद्र सिंह और नरेंद्र कुमार भी शामिल थे। इस आयोग ने सामान्य वर्ग को आरक्षण देने संबधि रिपोर्ट जुलाई 2010 में सौंपी थी।
यह भी है खास
-सामान्य वर्ग के पिछड़े लोगों को इकोनॉमिक बैकवर्ड क्लास (ईबीसी) में शामिल किया गया था। केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग द्वारा गठित सिन्हो आयोग ने 2006 में ईबीसी की संज्ञा दी थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मेजर सिन्हो ने मीडिया से कहा था कि सिफारिशों को तैयार करने में अंबेडकर इंस्टिट्यूट और टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस की काफी मदद मिली। 4 वर्षों तक चले शोध कार्य के लिए कई बार टीम वहां गई। कई दौर की चार राष्ट्रीय पर कार्यशालाएं आयोजित की गई। कई अधिकारियों के साथ मंथन का दौर चला। इसके बाद सिफारिशों को रिपोर्ट में शामिल किया जा सका था।
-इस सिफारिश के पहले 28 राज्यों का दौरा किया और इंटरनेट के जरिए भी लोगों की राय ली गई। एक सदस्य ने हर राज्य में चार से पांच दिन बिताए। सभी मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा के बाद यह बड़ा निष्कर्ष निकल सका।