तेज बारिश एक ही बार में दिला देगी गर्मी से राहत! बस करना होगा अभी इतने दिन और इंतजार...
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित आसपास के इलाके में मानसून सामान्यत: 15 जून को प्रवेश करता है। लेकिन मानसून के कमजोर पड़ के चलते अब इसके 20 या 21 जून के बाद ही पहले प्री मानसून की स्थिति आएगी फिर मानसून के बाद ही आने की आशा है।
इस बार मानसून के समय से पहले ही आने की उम्मीद थी, जिसके लिए मौसम वैज्ञानिकों ने भी कहा था कि इस बार मानसून 11 जून को ही राजधानी में आ जाएगा। लेकिेन एक बार फिर मानसून आकाश से गायब हो गया। जिसके चलते 7 व 8 जून को जरूर प्री मानसून की बौछारे कुछ समय पड़ी, लेकिन इसके बाद से ये भी गायब हो गईं।
वहीं मानसून के संबंध में जानकारों का कहना है कि मानसून अचानक ही कमजोर पड़ गया जिसके चलते वह प्रदेश में आना तो दूर, दस्तक तक नहीं दे सका। मौसम विभाग से सेवानिवृत्त ओपी गुप्ता का कहना है कि मानसून कमजोर होने के कारण यह राजधानी तक आने में समय लगा रहा है। कुल मिलाकर अभी मानसून का 8 से 10 दिन और इंतजार करना होगा।
उनका कहना है कि मानसून की तिथि निकल जाने व मानसून के कमजोर पड़ जाने के बाद अब जल्द ही प्रदेश में मानसून प्रवेश कर सकता है। लेकिन ये वापसी करीब 21 या 22 जून के आसपास होगी, जो प्री मानसून की बारिश के रूप में हो सकती है। यानि 8 से 10 दिन पहले भी कहीं कहीं हल्की बारिश हो जाए।
इधर, समस्या बरकरार...
वहीं दूसरी ओर मानसून अटक जाने से राजधानी भोपाल में तपिश बरकरार है। जिसके चलते बड़े तालाब का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। शनिवार को इसका लेवल काफी कम पहुंच गया, जिसके कारण तालाब में बने पंपिंग स्टेशन पर लगे पंप बार-बार एयर लेने लगे हैं।
तालाब में पानी के कम हो जाने से सप्लाई प्रभावित हो रही है। वहीं कुछ इलाकों में कम दबाव से पानी सप्लाई हो रहा है तो कुछ जगहों पर एक दिन छोड़कर क्षमता से आधा ही पानी दिया जा रहा है। शहर की एक बड़ी आबादी इसके चलते जल संकट से जूझ रही है।
जानिये कब आएगा मानसून !...
मौसम के जानकारों के अनुसार मौसम में लगातार बदलाव जारी है। ऐसे में बादलों की आवाजाही फिर शुरू हो जाने से बारिश के आसार बन रहे हैं। लेकिन मौसम विभाग के चित्रों को देखकर लगता है कि मानसून अब 21 जून के बाद भी राजधानी में प्रवेश करेगा। हां ये अंदेशा भी है कि इससे पूर्व ही कहीं कहीं छुटपुट वर्षा हो जाए।
जानिये 7 दिनों तक कैसा रहेगा मौसम! weather forecast...
- 17 जून यानि रविवार को आसमान में बादलों की आवाजाही रहेगी, वहीं दोपहर व शाम के समय में कहीं कहीं 1—2 मिनट के लिए हल्की बूंदें भी गिर सकती हैं।
- 18 जून यानि सोमवार को भी आसमान में बादल रहेंगे। जो कहीं कहीं गरज व चमक भी सकते हैं। लेकिन इस दौरान भी हल्की कहीं कहीं बारिश का ही अनुमान है।
- 19 जून यानि मंगलवार व 20 जून बुधवार को भी मौसम की स्थिति 18 जून से मिलती जुलती ही रहेगी। यानि इस दौरान भी आसमान में बादल रहेंगे, लेकिन उमस अपना जोर दिखा सकती है। साथ ही इन दिनों न्यूनतम तापमान में वृद्धि भी हो सकती है।
- 21 जून यानि गुरुवार को आसमान में बादल छाए रहेंगे वहीं ओट से सूरज भी दिख सकता है। लेकिन शाम तक बारिश का अच्छा अनुमान है। इस दिन न्यूनतम तापमान में कमी आ सकती है।
- 22 जून यानि शुक्रवार को भी बारिश का अंदेशा बना रहेगा वहीं मौसम भी सुहावना रहने की उम्मीद है।
- 23 जून यानि शनिवार को भी मौसम के सुहावना बने रहने के साथ ही सुबह या शाम के समय बौछारें गिर सकती हैं।
आएगा तेज पानी और फिर...
मौसम विभाग से पूर्व में जुड़े रहे एसपी शर्मा बताते हैं कि ये सही है कि मानसून के कमजोर पड़ने से यह समय पर नहीं आ सका लेकिन अगले कुछ दिनों में यह फिर तीव्रता पकड़ेगा। और उसके बाद पूरा प्रदेश बारिश में सराबोर हो जाएगा।
उनका अनुसार जैसा मौसम संकेत दे रहा है उससे लगता है कि जल्द ही बारिश का वो तेज झोका आएगा, जो एक ही बार में गर्मी की सारी तपिश को भूला देगा। लेकिन यदि देरी हुई तो ये बारिश की तीव्रता जुलाई के शुरू में भी आ सकती है। और यदि कोई गड़बड़ी नहीं हुई तो ये स्थिति जून के अंतिम में यानि 21 के बाद कभी भी सामने आ सकती है।
अभी ये है स्थिति:
यहां अटका मानसून- भोपाल मौसम केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार मानसून अभी महाराष्ट्र के मुंबई, अहमदनगर, अमरावती, गोंदिया के अलावा पश्चिम बंगाल के कोलकाता, असम के मदनापुर, गोपालपारा क्षेत्रों में अटका हुआ है। इसकी वजह बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में मानसून को आगे बढ़ाने वाला कोई सिस्टम नहीं बना है।
मानसून का ऐसे चलता है पता- जानकारों का कहना है कि इसके लिए करीब तीन किमी ऊपर हवा में 90 फीसदी नमी होना चाहिए। वहीं मौजूदा हवा का रुख भी दक्षिण-पश्चिमी होना चाहिए। इसके साथ ही इसे एक या दो दिन लगातार ज्यादा मात्रा में पानी बरसना चाहिए।
इन कारणों से हो रही देरी- इस बार मौसम वैज्ञानिकों का मानना था कि मानसून 11 जून को ही भोपाल में प्रवेश कर जाएगा। इसके चलते 7 व 8 जून को प्री-मानसून की बौझारें भी पड़ी, लेकिन उसके बाद आसमान से बारिश गायब ही हो गई।
इस संबंध में मौसम विभाग से पूर्व में जुड़े रहे एसपी शर्मा का कहना है कि मानसून में देरी की मुख्य तौर पर दो वजहें दिख रही हैं... इसमें पहला कारण ये है कि बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र यानी लो प्रेशर सिस्टम बन गया है, अब इसके डिप्रेशन बदलने की संभावना है। लेकिन यह सिस्टम मप्र के लिए फायदेमंद नहीं होगा।
इसकी कारण बताते हुए वे कहते है कि डिप्रेशन बदलने के चलते यह पश्चिम बंगाल के उत्तर पश्चिमी हिस्से में या ओडिशा में मैदानी इलाकों में पहुंचकर विलुप्त हो जाएगा। वहीं मौसम विभाग के पूर्वानुमान बताने वाले ज्यादातर मॉडल के अनुसार अगले दो हफ्ते तक हिंद महासागर में बड़ा सिस्टम बनने की संभावना नहीं है। इसीलिए मानसून के आगे बढ़ने की संभावना कम है।
मानूसन के ये दो रास्ते- जानकारों के अनुसार मानसून के यहां आने के दो प्रमुख रास्तें हैं। इनमें से पहला गुजरात के भरूच से बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला होते हुए आता है। जबकि दूसरा मुंबई, सूरत, जलगांव, अमरावती, नागपुर, गोंदिया से बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा होता हुआ पहुंचता है।
शर्मा का कहना है कि मुंबई में जल्द ही मानसून रफ्तार पकड़ता दिख रहा है, ऐसे में इसके 21 के बाद ही हल्के रूप में यानि प्री मानसून के रूप में यहां आने की पूरी संभावना है। जिसके कुछ दिनों बाद ही मानसून के भी यहां पहुंच जाने की पूर्ण आशा है।