
MP Cabinet Meeting- मध्यप्रदेश के मंत्रिमंडल समूह की अहम बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई, जिसमें कई प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही पिछले दिनों हुए कई फैसलों के क्रियान्वयन पर भी खुशी व्यक्त की गई।
मोहन कैबिनेट की बैठक के फैसलों की जानकारी मंगलवार को सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री चैतन्य कश्यप ने मीडिया को दी। मंत्री कश्यप ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में संपन्न कैबिनेट बैठक में लगभग ₹24500 करोड़ के विभिन्र प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने अभियान चलाकर 900 से अधिक लंबित अनुकंपा नियुक्तियों की प्रक्रिया पूर्ण कर दी है। अन्य विभागों को भी अनुकंपा नियुक्तियां जल्दी से जल्दी करने के लिए निर्देशित किया गया है। भोपाल के मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट जारी कर दिया गया है और इस पर आम नागरिकों के सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।
कश्यप ने बताया कि यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में भारत के कुल 78 स्थलों को शामिल किया गया है, जिनमें 19 स्थल मध्यप्रदेश के हैं। इनमें बाग गुफाओं की चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिर समूह और उदयगिरि की गुफाएं जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थल शामिल हैं।
मंत्री कश्यप ने आगे बताया कि विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्ध घुमन्तु वर्गों के विभाग अंतर्गत आने वाले छात्रावासों एवं संबंधित संस्थानों को भी अब ₹1 प्रति किलो की दर से अनाज उपलब्ध कराया जाएगा। यह निर्णय इन संस्थानों में रहने वाले विद्यार्थियों एवं जरूरतमंदों के हित में एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी कदम है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए चार बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को भी मंजूरी मिली है। साथ ही, कोर्ट भवनों के निर्माण के लिए ₹651 करोड़ और हेल्थ सेंटर्स के लिए ₹3,113 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।
इसके अलावा दतिया की मां रतनगढ़ सिंचाई परियोजना के लिए 1,608 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसके माध्यम से 78,484 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है और परियोजना को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रामपुरा-मनासा सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिए ₹524 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। इससे 65,400 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित होगी।
चैतन्य कश्यप ने बताया कि उज्जैन की खान डायवर्सन योजना के तहत क्षिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के उद्देश्य से 30 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जा रहा है, जिसका 51% कार्य पूर्ण हो चुका है। वहीं, सागर सिंचाई परियोजना के लिए ₹1,052 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। इसके माध्यम से 80,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इन परियोजनाओं से प्रदेश में सिंचाई का विस्तार होने के साथ किसानों को लाभ मिलेगा और न्यायिक एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।