
भोपाल. वन विभाग के मैदानी अमले और उडऩदस्ते की कार्यप्रणाली पर लगातार उठते सवालों के बीच नवागत सीसीएफ रविन्द्र सक्सेना ने इनकी जिम्मेदारी तय करने की कवायद शुरू कर दी है। सीसीएफ ने उडऩदस्ते की गश्त और नाकों पर ड्यूटी के लिए नई व्यवस्था बनाई है। नए निर्देशों के तहत उडऩदस्ता अमले को किसी भी जगह जांच पर जाने से पहले पूरी जानकारी दर्ज कराकर जानी होगी। साथ ही नाकों पर ड्यूटी करने वाले कर्मचारियो को हर घंटे की जानकारी का अपडेट कंट्रोल रूम को देना होगा।
उडऩदस्ते की ओर से वन क्षेत्रों के अलावा राजमार्गों पर की जा रही जांच को लेकर कई शिकायतें मिल रही थीं। सीसीएफ ने नई व्यवस्था के तहत एक रोजनामचा मेंटेन करने को कहा है। अब उडऩदस्ते के सभी कर्मचारी एक साथ गश्त पर जाने के बजाय दो अलग-अलग वाहनों में रवाना होंगे। प्रत्येक रात में जांच पर निकलने से पहले उडऩदस्ता दल को पूरी जानकारी रोजनामचे में दर्ज करनी होगी कि कितने व्यक्ति किस वाहन से किस जगह सर्चिंग पर जा रहे हैं। इतना ही नहीं सर्चिंग के बाद भी रिपोर्ट देनी होगी कि कहां क्या चैक किया और मोके पर क्या पाया गया। यदि जांच के दौरान कुछ भी संदिग्ध मिलता है तो उसकी रिपोर्ट भी तुरंत अधिकारियों को देनी होगी।
इसी तरह वन्य क्षेत्रों में चल रही चौकियों और नाकों पर तैनात कर्मचारियों को प्रत्येक घंटे पर अपनी लोकेशन और ऑल करेक्ट अपडेट कंट्रोल रूम को देना होगा। इससे जहां पारदर्शिता आएगी वहीं नाइट ड्यूटी में लगे गार्ड हर घंटे अपडेट मैसेज देने की बाध्यता के चलते चौकी बंद करके सो नहीं सकेंगे।
सीसीएफ ने वन्य क्षेत्रों की सुरक्षा सहित वन अपराधों को रोकने के लिए गश्त में चुस्ती और पारदर्शिता लाने के लिए कई व्यवस्थाएं शुरू की हैं। इससे निश्चित तौर पर कसावट आएगी और मैदानी अमला पहले से ज्यादा जिम्मेदारी से काम करेगा। इस व्यवस्था को लागू किया जा रहा है।
हरिशंकर मिश्रा, डीएफओ