
CM Mohan Yadav : मध्यप्रदेश में ग्राम पंचायतों में लाखों काम अटके पडे हैं। इससे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और सरकार काफी नाराज हैं। अटके कामों को गति देने और व्यवस्था को सुधारने के लिए राज्य सरकार सख्ती दिखा रही है। पंचायत सचिवों के कामकाज की समीक्षा कर लापरवाही पाए जाने पर उन्हें हटाने की तैयारी भी की जा रही है। हाल ये है कि भोपाल जिले की ही ग्राम पंचायतों में करीब 4 हजार काम अटके हुए हैं। पिछले सप्ताह हुई समीक्षा के बाद इन पंचायतों में पदस्थ पंचायत सचिवों को बदलने की तैयारी की जा रही है। प्रदेश भर में ग्राम पंचायतों में यही स्थिति है जिसपर सरकार ने सख्ती दिखाना शुरु कर दिया है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्पष्ट कर चुके हैं कि काम नहीं करने वाले सचिवों को पद से हटा दिया जाएगा। उन्होंने पिछले साल भोपाल में आयोजित सरपंच महासम्मेलन में लापरवाही बरतने वाले ग्राम पंचायत सचिवों को सख्त चेतावनी दी थी।
भोपाल में 42 ग्राम पंचायतों में सरकारी निर्माण कार्यों की धीमी गति और समय पर काम पूरा नहीं होने के मामलों को गंभीरता से लिया गया है। पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, आंतरिक रोड, नाली निर्माण और अन्य स्थानीय विकास के 3698 काम तय समय से लेट चल रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की सरकारी मंशा पूरी नहीं हो पा रही। योजनाओं के क्रियान्वयन और स्वीकृत राशि के उपयोग पर भी सवाल खड़े होते हैं।
जिन ग्राम पंचायतों में काम अटके हैं या जहां भ्रष्टाचार और गंभीर लापरवाही सामने आई है, वहां पंचायत सचिवों को पद से हटाने व अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरु की जा रही है। मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 40 के तहत सचिवों को कार्रवाई की जाएगी।
अगरिया पंचायत में सरपंच व ग्रामीण सचिव के खिलाफ छह अक्टूबर को ही धरने पर बैठे थे। सचिव हेम सिंह राजपूत पर कार्यालय तक नहीं खोलने का आरोप भी लगाया था।
जिला पंचायत की बैठक में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्यों ने गांवों में जलापूर्ति से जुड़े काम नहीं हो पाने को लेकर हंगामा किया था।
जिले की हबीबगंज, पिपलिया हसनाबाद, गोंदीपुरा, सेमरीकला जैयी पंचायतों में शिकायतों पर पहले भी नोटिस जारी किए गए हैं।
11 नवंबर 2025 को सचिवों को लेकर शिकायतें आई तो मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंच से सख्ती के निर्देश दिए थे।