
जंगल में बाध, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
Bhopal news:मध्यप्रदेश में जंगल-वन्यजीवों की सुरक्षा करने वाली समितियों की संख्या 14264 पर आकर सिमट गई है। इनमें से भी 72 फीसद निष्क्रिय हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कई में विवाद चल रहे हैं तो कुछ का कार्यकाल वर्षों पहले खत्म हो चुका है। वन विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी वन समितियों की संख्या जीरो है, जबकि इस समय यहीं पर बाघों को सबसे ज्यादा खतरा है। बीते 10 वर्षों में यहां पर कई बाघों की जान जा चुकी है।
शहरों के आसपास वन भूमि पर तेजी से कब्जे हुए। अब गांवों के आसपास का जंगल कब्जाया जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि शहर से लेकर गांवों तक तेजी से आबादी का दबाव बढ़ा है। खाली जमीनों पर रातों-रात कब्जे हो रहे हैं। यही हाल रहा तो जंगल बर्बाद हो जाएंगे। इसी बर्बादी को लोगों की सहभागिता से रोकने के लिए वर्षों पहले वन समितियों को अस्तित्व में लाया गया था लेकिन अफसरों ने इन समितियों की ही कमर तोड़ कर रख दी है। वन बल प्रमुख से लेकर सीसीएफ, डीएफओ भी विवादों को सुलझाने व समितियों को सक्रिय बनाने पर ध्यान नहीं दे पा रहे।
बांधवगढ़ देश में एकमात्र ऐसा टाइगर रिजर्व है, जहां बीते 10 वर्षों में सबसे ज्यादा बाघों की मौतें हुई हैं। इनमें शिकार व बाधों के बीच आपसी संघर्ष के मामले अधिक है। असल में इसका क्षेत्र 1536.93 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें बाधों की अनुमानित संख्या 180 से 200 के पार हो चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक बाधों के लिए यह रिजर्व काफी मुफीद रहा है लेकिन जिस तेजी से संख्या बढ़ रही है, उस अनुरूप चुनौतियां भी बढ़ी हैं।
चार तरह की समितियां बनाई जाती थी, जिनमें ग्राम वन समिति, वन संरक्षण समिति, इको विकास समिति और वन एक्सटेंशन समिति शामिल है। इनमें ग्राम वन समितियों की संख्या 9344, वन संरक्षण समिति 4311, ईको विकास समिति 606 और वन एक्सटेंशन समितियों की संख्या 3 रह गई है।
समितियों में स्थानीय लोगों को सचिव और अध्यक्ष का जिम्मा दिया जाता है। ताकि स्थानीय लोगों की सहभागिता से वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा हो सके, लेकिन कई समितियों में विवाद के कारण जंगल बर्बाद हो रहे हैं। दूसरी ओर अधिकारी मौके पर नहीं जाते, जिससे कब्जा तेजी से बढ़ रहा है।
-कई जिलों में समिति के अध्यक्ष, सचिव व कई सदस्य ही कब्जा करवा रहे, जंगल के अंदर से रेत चोरी व पेड़ों की कटाई में शामिल है।
-कुछ जिले ऐसे है. जहां अध्यक्ष, सचिव समितियों में बने तो रहना चाहते हैं लेकिन रिश्तेदारी निभा रहे हैं इसलिए कब्जा करने वाले, पेड़ काटने वालों की सूचना विभाग को नहीं दे रहे।
-समितियों में कुछ लोग वन विभाग के औचक निरीक्षण की सूचना माफिया को देकर सांठगांठ से लाभ कमाने में लगे हैं, जिससे समिति के उददेश्य परे नहीं हो हो रहे।
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खंडवा-884
उज्जैन-786
Updated on:
21 Oct 2026 09:52 am
Published on:
21 Oct 2026 09:52 am
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