भोपाल

महंगी होने वाली हैं दवाएं! मिडिल ईस्ट क्राइसिस का असर अब आपकी मेडिकल किट पर

MP Medicines Will be Expensive: मध्य प्रदेश की छोटी बड़ी 200 से ज्यादा फार्मा कंपनियां चीन पर निर्भर, चीन ने 166 फीसदी तक महंगा किया कच्चा माल(एपीआई) , सबसे ज्यादा असर बीपी-शुगर और अस्थमा के मरीज होंगे परेशान...
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Apr 08, 2026
MP News Medicine will be Expensive in mp india
MP News Medicine will be Expensive in mp india(photo:patrika creative)

MP Medicines Will be Expensive: मिडिल ईस्ट में वार का अंजाम ये हुआ है कि अब महंगाई ने आम जिंदगी में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। होटल-रेस्टोरेंट्स में खाना महंगा हो गया, यहां तक कि आम भारतीय की पहली पसंद समोसा-कचोरी और चाट तक के पैसे बढ़ गए। 10 रुपए का समोसा 20 का मिलने लगा। गैस संकट ने हर परिवार का खर्च दोगुना कर दिया। वहीं अब ताजा खबर ये है कि आपदा में अवसर चीन ने भी खोज लिया। इसका बड़ा असर ये होने जा रहा है कि अब आपकी मेडिकल किट भी आपकी जेब पर बोझ बढ़ाने वाली है।

युद्ध से ग्लोबल सप्लाई हुई प्रभावित

दरअसल ईरान-इजरायल युद्ध के कारण ग्लोबल सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके कारण दवाओं का कच्चा माल 166 फीसदी तक महंगा हो गया है। अगर यह तनाव लंबा खिंचा, तो बाजार में दवाओं की कीमतें 25 से 30 फीसदी तक बढ़ सकती है। दवाएं महंगी होने से सबसे ज्यादा वे मरीज परेशान होंगे जो बीपी, शुगर और अस्थमा जैसी बीमारियों के लिए हर दिन दवाएं खाते हैं।

मध्य प्रदेश की 200 से ज्यादा फार्मा कंपनियां चीन पर निर्भर

मध्य प्रदेश की छोटी-बड़ी 200 से ज्यादा फार्मा कंपनियां कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। युद्ध के कारण शंघाई पोर्ट मुंबई तक आने वाले जहाजों को अब सुरक्षित रास्तों के चक्कर में 30-40 की जगह 80-90 दिन लग रहे हैं। शिपिंग लागत 15 रुपए से बढ़कर 40 रुपए प्रति किलो पहुंच गई है। कारोबारियों का दावा है कि लागत दोगुनी होने के कारण कीमतों में इजाफा करना पड़ेगा।

जेनेरिक दवाओं और केमिस्ट शॉप्स पर डिस्काउंट बंद

दवा बाजार के एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सबसे पहला असर जेनेरिक दवाओं और केमिस्ट की दुकानों पर मिलने वाले डिस्काउंट पर पड़ा है। जो दवाएं अब तक 10-20 फीसदी की छूट पर मिल रही थीं। अब वे एमआरपी पर ही बिक रही हैं। आने वाले 15-20 दिन में एथिकल यानी ब्रांडेड और सर्जिकल सामान भी महंगा होने के आसार हैं।

देशभर में तैयारी शुरू

बेसिक ड्रग डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक कच्चे माल की कमी के कारण और बढ़ते माल भाड़े के कारण उद्योग को प्रभावित किया है। केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ के मुताबिक देश भर में इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। अगले 15-20 दिन में इसका असर दिखने लगेगा। रोज दवा लेने के वाले मरीजों पर असर ज्यादा होगा।

जिन परिवारों में बुजुर्ग, उनकी जेब पर दोगुना असर

जिन परिवारों में दो बुजुर्गों का मासिक खर्च यदि 3000 रुपए है, तो डिस्काउंट खत्म होने और दवाओं के नए रेट बढ़ने के बाद यह 3800 तक पहुंच सकता है। कच्चा माल महंगा होने पर टेंडर वाली छोटी कंपनियां सप्लाई से पीछे हट सकती हैं। इससे सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाओं में कमी की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

बुखार, खांसी की दवाओं का कच्चा 155 फीसदी महंगा!

पैरासिटामोल बुखार की दवा है, पहले इसके कच्चे माल की कीमत 225 रुपए प्रति किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर 575 हो जाएगी। वहीं कफ सीरप प्रोपलीन ग्लाइकोल 150 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 400 रुपए हो गया है। इंफेक्शन के लिए दी जाने वाली एजिथ्रोमाइसिन का सामान 11,000 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 14,500 रुपए तक महंगा हुआ है। आईब्रुफेन जैसी दर्द निवारक दवाई बनाने के लिए कच्चे माल की कीमतें 600 रुपए से बढ़कर 900 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई हैं। वहीं एंटीबायोटिक सिफेक्सिन का सामान 8500 से बढ़कर 11000 रुपए प्रति किलोग्राम तक महंगा हुआ है। इसका असर अब इनकी दवाओं पर दिखेगा और ये दवाएं भी महंगी हो सकती हैं।

Updated on:
08 Apr 2026 09:33 am
Published on:
08 Apr 2026 09:33 am