
Bhopal News : बदलते मौसम के दौरान मध्य प्रदेश में बच्चों पर बीमारियों की दोहरी मार पड़ रही है। सर्दी-खांसी, जुकाम और वायरल संक्रमण बढ़ा रहा है। कुछ बच्चों में ये संक्रमण और बुखार लंबे समय तक चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में संक्रमण फेफड़ों में पहुंचकर निमोनिया में बदल रहा है। दूषित पानी और संक्रमित भोजन से उल्टी-दस्त, पेट दर्द और आंतों के संक्रमण यानी गैस्ट्रोएन्टराइटिस के मरीज बढ़ रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में बच्चों और पेट के मरीजों की भीड़ बढ़ गई है।
राजधानी भोपाल के जयप्रकाश जिला अस्पताल की ओपीडी में हर रोज 175 से 200 बच्चे इस तरह की समस्या से ग्रस्त होकर आ रहे हैं। इनमें सर्दी-खांसी, जुकाम, लंबे समय तक बुखार और सांस की समस्या से पीड़ित बच्चों की लगातार संख्या बढ़ रही है। अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष पंचरत्न के अनुसार, जांच में ऐसे 15 से 20 बच्चों में निमोनिया के लक्षण मिल रहे हैं। दवाओं का पूरा डोज लेने के बाद भी कुछ बच्चे स्वस्थ्य नहीं हो रहे हैं। ऐसे बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है।
डॉ. पंचरत्न का कहना है कि, बदलते मौसम को हल्के में लेना बच्चों की सेहत पर भारी पड़ सकता है। घर में किसी सदस्य को वायरल संक्रमण होने पर घर में उसके आसपास रहने वाले छोटे बच्चों को भी संक्रमण होने की संभावना बहुत अधिक हो रही है।
वहीं, राजधानी भोपाल में मलेरिया संक्रमण नियंत्रण में है, लेकिन प्रदेश के कई जिलों में बीमारी का खतरा लगातार बढ़ रहा है। भोपाल में जनवरी से अगस्त तक मलेरिया की 1,53,666 की जांच की गई है। लेकिन, इनमें मलेरिया के सिर्फ 8 मरीज ही मिले हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल कम जांच हुई है। 2025 में इस अवधि में 155900 जांच हुई थी और 6 पॉजेटिव पाए गए थे। हालांकि, अब तक डेंगू के 10 मरीज भोपाल में मिल चुके हैं।
इसके उलट प्रदेशभर में जुलाई तक ही मलेरिया के 598 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें अकेले बालाघाट जिले में सबसे अधिक 174 मरीज मिले हैं। मानसून के दौरान जारी बारिश के चलते कुछ जिलों में मलेरिया के मामले तेजी से बढ़े हैं, जो स्वास्थ्य विभाग के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
-प्रदेश: जुलाई तक 598 मामले
-भोपाल: जनवरी-अगस्त तक सिर्फ 8 मामले
-बालाघाट: 174 मामले
-छिंदवाड़ा: 67 मामले
-जुलाई में प्रदेश: 248 मामले
-जुलाई में बालाघाट: 102 मामले