MP News: नीतिगत मामलों की बैठक में सीएम ने किए बड़े फैसले, मेडिकल यूनिवर्सिटी पर पेंच, आरजीपीवी दो से तीन कैंपस होंगे, क्या खत्म हो जाएगा PHE विभाग...?
MP News: गांव से लेकर शहर तक लोगों के लिए पीने के पानी का इंतजाम करने वाला मध्यप्रदेश का सबसे पुराना लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के अमले को मोहन सरकार दो विभागों में मर्ज करने जा रही है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को ली नीतिगत मामलों की एजेंडेवार बैठक में मौखिक सहमति दे दी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पीएचई का अमला पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को और शहरी क्षेत्रों में कार्यरत विभाग के अमले को नगरीय विकास एवं आवास विभाग को दिया जाएगा। विभाग को पूरी तरह खत्म किया जाएगा या नहीं, इस पर निर्णय होना बाकी है।
सीएम का निर्णय केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के उस फैसले के अधीन है, जिसमें कुछ दिन पहले ही केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय ने मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों से अपेक्षा की है कि एकल नल-जल योजना का पूरा जिम्मा पीएचई से लेकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को दे दिया जाए। एमपी में इस पर पहले से काम चल भी रहा था कि अब पीएचई को ही दो विभागों में मर्ज करने की तैयारी है।
उधर ओंकारेश्वर व ममलेश्वर को मिलाकर ओंकारेश्वर-ममलेश्वर विकास प्राधिकरण (ओएमडीए) बनाए जाने पर भी विचार हुआ है।
- जितने भी स्कूल है, वे सभी स्कूल शिक्षा विभाग के तहत चलेंगे।
- सांदीपनि स्कूलों के भवन बड़े है, इनमें एक ही शिफ्ट लगती है, उनका अन्य गतिविधियों के लिए उपयोग करना।
- कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को एक में मिलाया जाएगा, दूसरे बंद किए जाएंगे।
- स्वामित्व योजना का विस्तार होगा, 50 लाख पट्टे वितरण का कार्यक्रम होगा, प्रधानमंत्री आ सकते है।
- पंचायतों में आबादी भूमि घोषित करने की प्रक्रिया को सरल करना।
- पीने के पाने की आपूर्ति वाली व्यवस्था की समीक्षा, लापरवाही पर ठोस कार्रवाई करने की छूट।
- जितनी भी योजनाएं, जिनमें महिलाओं व अन्य वर्गों के पात्रताधारियों को रुपए दिए जाते हैं, उन योजनाओं की समीक्षा की जाकर संबंधितों को रोजगार से जोडऩे पर बात।
मोहन सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को जिस तरह से गति देने में जुटी है, उस अनुरूप मेडिकल यूनिवर्सिटी का भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में अलग-अलग विस्तार पर चर्चा हुई। इसमें लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अशेाक बर्णवाल की ओर से कानूनी पहलुओं की जानकारी दी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने उक्त मसले के अध्ययन करने का सुझाव दिया। साथ ही युवाओं की मांग और जरूरतों को देखते हुए आरजीपीवी के प्रदेश में अन्य कैंपस खोले जाने पर बातचीत हुई।