MP TET Controversy: मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा विवाद में नया मोड़, लोक शिक्षण संचालनालय ने 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों का भी मांगा डेटा, नौकरी पर तलवार लटकती देख अब नाराज शिक्षक संगठनों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी...
MP TET Controversy: मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में जारी निर्देशों के बाद अब उन शिक्षकों को भी TET देना पड़ सकता है, जो पहले ही पात्रता परीक्षा पास कर चुके हैं। इस फैसले से प्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। नौकरी पर तलवार लटकने के बाद शिक्षक संगठनों ने आदेश को पलटने की मांग की है। फैसला नहीं बदला गया तो बड़े आंदोपन की चेतावनी भी जारी की है।
जानकारी के मुताबिक, लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने जिलों से ऐसे शिक्षकों का डेटा मांगा है, जिन्होंने पूर्व में बिना TET के नियुक्ति पाई थी या पुराने नियमों के तहत पात्रता हासिल की थी। इसमें खासतौर पर वर्ष 2005 और 2008 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े करीब 70 हजार शिक्षकों को शामिल किया गया है। ऐसे में अब आशंका जताई जा रही है कि इन शिक्षकों पर भी नए नियम लागू किए जा सकते हैं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। उनका तर्क है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय के नियमों के अनुसार वैध थी, उन्हें अब नए नियमों के तहत परीक्षा देने के लिए बाध्य करना गलत है। इसे लेकर प्रदेशभर में विरोध शुरू हो गया है और कई जगहों पर ज्ञापन भी सौंपे जा रहे हैं।
संगठनों ने साफ कहा है कि यह केवल परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि 'नीति बनाम न्याय' का सवाल है। उनका कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के नाम पर पुराने नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों पर नए नियम थोपना कानूनी रूप से भी कमजोर कदम है।
यह मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने की बात सामने आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं करती, तो बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं।
शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए। उनका कहना है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। फिलहाल, पूरे मामले में सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है।