
भोपाल. क्राइम ब्रांच ने 500-500 के नकली नोट खपाने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों एक अनाज कंपनी के पूर्व एजेंट हैं। धंधे में हुए घाटे को भरने की लालच में दोनों सलाखों के पीछे पहुंच गए। उन्हें अफ्रीकन मूल के दो सरगनाओं ने भोपाल में दो लाख रुपए के बदले 6 लाख के नकली नोट दिए थे। दोनों ने पैसों को जल्द खपाने के लिए बंच नोट एक्सेप्टर (बीएनए) मशीन से अपने खाते में पैसे जमा किए। नकली नोट भी ऐसा था कि मशीन भी नहीं पकड़ सकी। दोनों को अफ्रीकन मूल के सरगनाओं ने 6 लाख के नकली नोट खपाने के बाद 6 लाख के असली नोट के बदले 12 लाख के डॉलर देने का वादा किया था।
डीसीपी क्राइम ब्रांच अमित कुमार ने बताया कि 11 मई को आईडीबीआई बैंक की टीटी नगर ब्रांच के मैनेजर अतुल मिश्रा ने शिकायत की थी कि किसी ने बीएनए मशीन में 500-500 रुपए के 47 नकली नोट एक खाते में जमा कराए हैं। पुलिस ने मशीन के कैमरे के फुटेज देखे तो पता चला कि टोपी और मास्क लगा एक युवक ने 23500 रुपए जमा किए। हुलिए और खाता नंबर के आधार पर सागर स्टेट अयोध्या नगर के संजय (27) पिता सुंदरलाल राजपूत को हिरासत में लिया। उसके घर से 500-500 के 232 और पवनीश से 472 नकली नोट बरामद किए हैं।
फेसबुक पर दोस्ती के बाद खरीदे नोट
संजय ने पुलिस को बताया, वह ग्वालियर रीजन की एक अनाज कंपनी में यूपी के पवनीशकांत द्विवेदी (42) के साथ एजेंट था। कंपनी वेयर हाउस से अनाज खरीदती थी। इसमें उसे घाटा हुआ। फिर दोनों को फेसबुक पर अफ्रीकन मूल के स्माइल और पाल ने फे्रंड रिक्वेस्ट भेजी और नकली नोट देने की जानकारी दी। 3 माह पहले पवनीश व संजय की लखनऊ जाते समय ट्रेन में स्माइल और पॉल से डील हुई। कुछ दिन पहले दोनों सरगना ने भोपाल में विदेशी महिला के पासपोर्ट पर कमरा बुक किया था। दोनों ने संजय और पवनीश को 1-1 लाख के बदले 3-3 लाख दिए थे।
बैंगलुरू से चलाते थे नेटवर्क
मुख्य सरगना बैंगलोर से नकली नोट सप्लाई करने का नेटवर्क चलाता है। क्राइम ब्रांच ने बैंगलुरू में दबिश दी लेकिन दोनों पहले ही वहां से भाग निकले। उनके वाट्सअप कॉल और मैसेंजर वाले नंबर भी दूसरे व्यक्ति का मिला।
महिलाएं और बच्चे थे सॉफ्ट टारगेट-
संजय और पवनिश नकली नोट खपाने हमेशा बाहरी जगह को चुनते थे।
दुकान में जब काउंटर पर महिला या बच्चा होता तो वे सामान खरीदने जाते।