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10वीं-11वीं कक्षा के स्टूडेंट्स के लिए बदलें नियम, अब ‘विषय’ की पाबंदी खत्म

MP News: 11 वीं गणित पढ़ने के लिए नौंवी में स्टैंडर्ड मैथ्स का चयन अनिवार्य था। मंडल की पाठ्यचर्या समिति यह रोक लगा दी।

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10th and 11th Grade Students

10th and 11th Grade Students (Photo Source: AI Image)

MP News: स्टूडेंट के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब दसवीं की परीक्षा पास कर चुके छात्र 11वीं में कोई भी विषय चुन सकेंगे। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने नियमों में बदलाव किया है। नियमों के तहत बेसिक गणित से नौंवी पास छात्र अगली कक्षा में स्टैंडर्ड मैथ्स का चयन कर पाएगा। मंडल ने विषय की पाबंदी को खत्म कर दिया है।

प्रदेश में नौ लाख स्टूडेंट ने इस साल दसवीं कक्षा की परीक्षा दी है। इसमें पास छात्र 11वीं में मैथ्स से लेकर कामर्स, आर्ट का चुनाव कर सकते हैं। इससे पहले 11 वीं गणित पढ़ने के लिए नौंवी में स्टैंडर्ड मैथ्स का चयन अनिवार्य था। मंडल की पाठ्यचर्या समिति यह रोक लगा दी। इसके आधार पर निर्देश जारी किए गए। यह इसी इसी सत्र से प्रदेश के सभी स्कूलों पर लागू होंगे।

इस कारण बदले थे नियम

पिछले साल मंडल ने बेसिक और स्टैंडर्ड मैथ्स का नियम लागू किया था। इसके मुताबिक नौंवी कक्षा में बेसिक लेने वाले स्टूडेंट को कक्षा 11वीं मैथ्स की पात्रता नहीं थी। इसके लिए 8 नवंबर 2024 को प्रदेश के सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए थे। ये आदेश अब निरस्त कर दिए गए।

स्कूलों में अब नए नियमों के आधार पर होगा काम

जानकारी के लिए बता दें कि 15 जून तक स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां रहेंगे। ये खत्म होने के बाद स्कूलों में अब नए नियमों के आधार पर स्कूलों में काम होगा। इसमें विषयों में बदलाव हो सकता है।

पाठ्यचर्या समिति की बैठक में इस पर निर्णय हुआ है। उसके आधार पर अब बेसिक गणित चयन वालों को 11वीं कक्षा में गणित चुनने की पात्रता होगी। सभी जिलों को इसके निर्देश जारी हो गए। ये इसी सत्र से लागू होंगे। - बुद्धेश्य वैद्य, सचिव माध्यमिक शिक्षा मंडल

स्कूलों में खाली सीटें खोजते रहे अभिभावक

भोपाल के निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन की प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो गई। अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत दाखिले दिए जा रहे हैं। पहले दिन अभिभावक स्कूलों में सीटें खोजते रहे। प्रक्रिया तो शुरू हो गई लेकिन आवेदन नहीं कर पाए। अभिभावकों ने इसकी शिकायत की है। राज्य शिक्षा केन्द्र के अधिकारियों ने बताया कि सीटों का आंकलन जिला स्तर पर हुआ। यह जिला परियोजना समन्वयक के जरिए किया गया था।

बच्चों की सेहत से बिजनेस

स्कूल बंद होते ही राजधानी में खेलों के नाम पर कारोबार शुरू हो गया। ये दो माह में बच्चों को खिलाड़ी से लेकर आर्टिस्ट बनाने के दावे कर रहे हैं। लेकिन इसकी हकीकत क्या है इसकी जांच के लिए इंतजाम ही नहीं हुई। मामले में खेल विभाग और जिला शिक्षा विभाग इन्हें अपने दायरे से बाहर बता रहा है। खामियाजा बच्चे भुगत रहे है। शहर में दो सौ समर कैंप है। इनमें एक लाख बच्चे हैं। राजधानी में सबसे बड़ा कैंप टीटी नगर में है। यहां खेलों को सिखाने प्रशिक्षक रखे गए।

ये खेल विभाग ने तय किए। स्कूलों में शिक्षकों को ट्रेनर बनाया गया है। इसके अलावा निजी स्तर पर जिन कैंप का संचालन है उनके ट्रेनर को लेकर कोई ब्योरा नहीं दिया गया। इनमें बच्चों को तैराकी, फुटबाल, जिम, किके्रट बॉक्सिंग सहित कई खेल से लेकर जूडो कराते, मार्शल आर्ट शामिल हैं। मिस्टर एशिया और फिटनेस कोच अभिषेक बघेल ने बताया समर कैंप बढ़ रहे है। लेकिन कोच नहीं बढ़े। ये बच्चों की सेहत से खिलवाड़ है।