बसपा सुप्रीमो माया का ऐलान: राजस्थान-मध्य प्रदेश में कांग्रेस से गठबंधन नहीं, जानिये क्या बोले दिग्विजय सिंह...
भोपाल। मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले ही कांग्रेस की कोशिशों को करारा झटका लगा है। इसके चलते मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की तमाम उम्मीदों पर एक पार्टी ने पानी फिरा दिया है।
दरअसल कांग्रेस की ओर से लगातार कोशिश की जा रही थी कि समान विचार धारा के दलों को साथ लेकर भाजपा का मुकाबला किया जाए। इसके तहत वे बसपा से भी तमाम तरह के समझौते करने को तैयार थे। लेकिन उनकी इन तमाम कोशिशों पर बसपा अध्यक्ष मायावती ने पानी फेर दिया है।
सामने आ रही जानकारी के अनुसार कांग्रेस से नाराज चल रहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर जमकर हमला बोलते हुए आगामी मध्य प्रदेश और राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और बीएसपी के बीच होने वाले गठबंधन नहीं होने के लिए बसपा अध्यक्ष मायावती ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को जिम्मेदार ठहराया है।
मायावती ने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी बसपा से गठबंधन चाहते थे, लेकिन दिग्विजय सिंह के चलते यह गठबंधन नहीं हो पाया। शायद दिग्विजय ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों से डर रहे हैं।
इसके साथ ही मायावती ने यह भी ऐलान किया कि उनकी पार्टी राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में क्षेत्रीय पार्टियों से साथ मिलकर चुनाव लडे़गी। उन्होंने कहा कि बीजेपी की महिला विरोधी, पूंजीपतियों की सहयोगी और दमनकारी नीतियों के खिलाफ ही हमारी पार्टी ने गठबंधन करने का फैसला किया था। वहीं जानकारों का कहना है कि मायावती के इस ऐलान से 2019 से पहले ही विपक्षी एकता हुई ढेर होती दिख रही है।
मायावती ने कहा कि जैसा उनकी पार्टी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, वैसा ही वह अन्य राज्यों में करेंगी। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बीएसपी अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। हमारा कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा।
ये भी लगाए आरोप...
वहीं मायावती ने ये भी कहा कि कांग्रेस बसपा की पहचान को खत्म करना चाहती है। और दिग्विजय सिंह और कुछ अन्य नेता नहीं चाहते थे कि बसपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन हो, कांग्रेस जातिवादी पार्टी है।
कांग्रेस पार्टी पर हमला करते हुए मायावती ने कहा कि कांग्रेस पार्टी गठबंधन की आड़ में बीएसपी को समाप्त करना चाहती है। बीएसपी और कांग्रेस में गठबंधन न होने पाए इसके पीछे दिग्विजय सिंह का निजी स्वार्थ शामिल है। मायावती ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की रस्सी जल गई, मगर बल नहीं गया।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि कांग्रेस ने गुजरात चुनाव परिणाम से कोई सबक नहीं लिया है। कांग्रेस को गलतफहमी है कि वह अकेले ही बीजेपी के साम, दाम, दंड भेद और ईवीएम जैसी चालों से पार पाकर जीत हासिल कर लेगी जो काफी हास्यास्पद है। पिछले परिणामों से साफ पता चलता है कि जहां बीजेपी का सीधा मुकाबला कांग्रेस से रहा वहां बीजेपी ने आसानी से जीत दर्ज की।
दिग्विजय सिंह ने भी दिया ये जवाब...
बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पर लगाए गए गंभीरआरोपों पर अब दिग्विजय सिंह ने भी सफाई दी है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं ये बात पहले ही साफ कर चुका हूं कि मैं मायावती जी का बहुत सम्मान करता हूं और वह भी कांग्रेस-बसपा गठजोड़ की प्रबल समर्थक रही हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ में, गठबंधन की बात चल रही थी लेकिन वह उसमें शामिल नहीं हुईं। वहीं मध्य प्रदेश में भी गठबंधन की बात चल रही थी, उन्होंने 22 सीटों पर उम्मीदवार भी घोषित कर दिए थे।
दिग्विजय सिंह ने आगे कहा,” जहां तक मेरा सवाल है, कृपया उनसे पूछिए, मैं मोदी जी और अमित शाह जी, बीजेपी और आरएसएस का सबसे कट्टर विरोधी हूं। राहुल गांधी हमारे कांग्रेस के मुखिया हैं, हम उनके आदेशों का पालन करेंगे।