भोपाल

प्रशासन प्रदूषण रोकने मियावाकी जंगल उगा रहा लेकिन महकमों का आपस में ही नहीं तालमेल

सरकारी महकमों के हजारों वाहन और बीसीएलएल की खटारा बसें फैला रही कार्बन मोनोऑक्साइड

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Nov 21, 2019
प्रदूषण करना पड़ा भारी, एनजीटी ने लगाया 292 करोड़ का जुर्माना

भोपाल/ शहर में वायु प्रदूषण को लेकर एक बार फिर खतरे की घंटी बजने लगी है। भोपाल शहर देश में 11वें नंबर पर सबसे प्रदूषित हवा वाला शहर पाया गया है जिसके चलते ये बहस और तेज हो गई है। सरकार का दावा है कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए राजधानी के चारों तरफ मियावाकी जंगल उगाए जा रहे हैं।

इसके लिए जिला प्रशासन, क्रेडाई, आईआईएफएम, एम्स, एमआईटी मिलकर प्रयास कर रहे हैं। इसके विपरीत सरकारी महकमों में चलने वाले स्टेट गैरेज और अनुबंध पर लगे 5 हजार चार पहिया वाहन और बीसीएलएल की 100 से ज्यादा खटारा बसें प्रतिदिन इतना कार्बनमोनोक्साइट पैदा कर रही हैं जिसे सोखने में मौजूदा जंगलों को दो से तीन दिन का वक्त लगता है।

कुल मिलाकर जंगलों को पैदा करने की रफ्तार मोनोक्साइड प्रोडक्शन रेट के मुकाबले बेहद धीमी है इसलिए मियावाकी जंगल उगाने की पहल का फायदा तभी है जब सरकारी महकमे कार्बन फुटप्रिंट छोडऩे वाली मशीनों का बटन मिलकर एक साथ बंद करें।

ये है बहस की प्रमुख वजह

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की देशभर के 200 शहरों की निगरानी रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर, हावड़ा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश लखनऊ, मेरठ, मुरादाबाद के बाद भोपाल देश में सर्वाधिक प्रदूषित शहर पाया गया है। भोपाल के प्रदूषण का स्तर मंडीदीप, देवास और रतलाम के औद्योगिक इलाकों से भी अधिक मिला है।

प्रदूषण दो साल में दोगुना

जिले में रजिस्टर्ड 17.50 लाख वाहनों में से केवल 60 प्रतिशत की जांच होने और बाकी 40 प्रतिशत वाहनों के भयंकर धुंआ उगलने के चलते प्रदूषण बहुत बढ़ गया है। पीसीबी के एयर क्वालिटी इंडेक्स में भोपाल शहर की हवा में दोगुना तक खतरनाक पार्टिकल्स बढ़ चुके हैं। पीसीबी ने चंद रोज पहले विश्व प्रदुषण दिवस पर ही चेतावनी जारी की थी कि यदि इसी रफ्तार से प्रदूषण बढ़ा तो 5 साल बाद भोपाल की हवा दिल्ली जैसी प्रदुषित हो जाएगी।

मोनोऑक्साइड ऐसे कर रही नुकसान

मोनोऑक्साइट का असर बदली के मौसम के तौर पर सामने आ रहा है। मौजूदा प्रदूषण की बड़ी वजह शहर के ऊपर बीते 48 घंटे से छाए कम ऊंचाई वाले बादल हैं, जो न तो पानी बरसा रहे हैं, नहीं शहरभर में निकलने वाले धुएं को आसमान में फैलने दे रहे हैं। हवा की गति थमी हुई है, इस कारण बीते दो दिन से हमारा शहर अस्थाई रूप से प्राकृतिक गैस चेंबर बन गया है। लगातार एम्बिएंट एयर क्वालिटी इंडेक्स बढऩे से हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है।

भोपाल में हवा कितनी जहरीली

प्रदूषक-अधिकतम-औसत-स्वीकार्य मात्रा
पीएम-2.5-308-239-0-30

पीएम-10-160-136-0-50
एनओ2-114-50-0-40

एनएच3-07-06-0-200
सीओ-112-45-0-1.0

ओजोन-90-81-0-50

प्रदूषण के बड़े कारणों में बिल्डिंग मटेरियल डस्ट, सड़क की धूल और वाहनों का धुंआ है। सरकार जब तक इन्हें नियंत्रित नहीं करेगी तब तक जंगलों के लगाने का फायदा नहीं होगा।
- डॉ राजेंद्र चतुर्वेदी, प्रभारी, पर्यावरण निगरानी केंद्र

Published on:
21 Nov 2019 09:24 am
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