कहीं देखा है ऐसा पक्षपात
भोपाल. एक तरफ मंत्रियों-अफसरों के बंगलों पर करोड़ों रुपए से मरम्मत की जा रही है, वहीं आम कर्मचारियों के एफ, जी, एच और आई श्रेणी के आवासों की दुर्दशा हो रही है। इनके लिए लोक निर्माण विभाग के पास पर्याप्त बजट नहीं होता है। इन आवासों में रंगाई-पुताई और नल-टोंटी ठीक करवाना हो तो कर्मचारियों को पसीना आ जाता है।
पिछले साल कोटरा-सुल्तानाबाद, शिवाजी नगर, तुलसी नगर और चार इमली के चार हजार सरकारी आवासों के लिए छह करोड़ बजट था। कम पड़ा तो दो करोड़ बढ़ाया गया। इसी तरह 2018-19 के लिए भी छह करोड़ रुपए के टेंडर निकाले गए हंै। तुलसी नगर, 74 बंगले, 45 बंगले और श्यामला हिल्स के 6500 आवासों की भी यही स्थिति है। इनके लिए अलग से बजट प्रावधान करने के बजाय हर छोटे काम के लिए उच्च स्तर तक फाइल पहुंचाना होती है। इन श्रेणियों के आवासों में आठ सालों तक पुताई तक नहीं होती है।
विरोध के सुर उभरे
इस तरह के पक्षपातपूर्ण व्यवहारसे कर्मचारियों को विरोध उभरने लगा है। दबी जुबान में अब तक वे दुख जताते रहे, लेकिन अब खुलकर सामने आने लग हैं। आवास छोड़ देने के हाल ही में कई मामले सामने आए हैं। आने वाले दिनों में ऐसे और भी मामले सामने आ सकते हैं।
परेशान हो गया तो मैंने आवास छोड़ दिया। साउथ टीटी नगर में 30-40 साल से लोग रह रहे हैं, लेकिन अब मकानों की दयनीय स्थिति हो गईं। पीडब्ल्यूडी विभाग के बजट का भी पता नहीं होता है।
लक्ष्मीनारायण शर्मा, महामंत्री, शासकीय तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ
पिछले दो-तीन साल में हमने एफ व अन्य श्रेणी के आवासों में काफी काम किया है। बाथरूम, किचन, टाइल्स और रंगाई-पुताई का काम अधिकतर आवासों में हो चुका है। किसी आवास में यदि कोई काम करवाना हो तो उसकी फाइल ऊपर तक भेजना होती है, इसलिए समय अधिक लगता है, लेकिन काम हो जाता है।
पंकज व्यास, कार्यपालन यंत्री, नया भोपाल संभाग पीडब्ल्यूडी