भोपाल

28 साल से औद्योगिक क्षेत्र की सडक़ों के विकास के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति

2015 से 70 करोड़ से विकास का बजट सेंशन होने के बाद रुका हुआ है
2 min read
Nov 06, 2018
dovelepment in industry
28 साल से औद्योगिक क्षेत्र की सडक़ों के विकास के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति

भोपाल. यूं तो शासन प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने का हर साल ढोल पीटती है। देश-विदेश की कंपनियों को यहां बेहतर व्यवस्था देने का दावा करती है, जबकि राजधानी के गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र के हाल यह है कि 1990 से यहां सम्पूर्ण सडक़ व नाले का विकास नहीं हुआ है।

शासन ने यहां विकास की घोषणा तो बड़ी-बड़ी कर रखी है। विकास की बारी आती है तो काम खानापूर्ति कर दी जाती है। इन दिनों औद्योगिक क्षेत्र में साढ़े सात करोड़ से सडक़ों का विकास हो रहा है। 2015 से घोषित 70 करोड़ से होने वाले विकास की तुलना में यह दस प्रतिशत ही विकास होगा।

करीब दस सेक्टर में बंटे 1120 उद्योगों की 30 किलोमीटर लम्बी सडक़ों के विकास को लेकर सौ करोड़ का बजट 2015 में बना था, पर 30 करोड़ की लागत से यहां तीन सेक्टरों में ही सीमेंट कांक्रीट की सडक़े बनाई गईं। बाकी के 70 करोड़ का काम स्वीकृत होने के बावजूद शुरू नहीं हुआ। बारिश में यहां भारी वाहनों के गड्ढों में फंसने पर उन्हें निकालने जेसीबी मशीन बुलाई पड़ती है।

उद्योगपतियों के विरोध के चलते उद्योग विभाग ने फिर 7.5 करोड़ की लागत से सडक़ों के विकास का जुलाई में टेंड र तो निकाला है, जिसका कार्य तीन माह बाद अक्टूबर में जाकर शुरू किया गया। यह राशि यहां की सारी सडक़ों की हालत सुधारने में ऊंट के मुंह में जीरा साबित होगी।

इन दिनों गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में स्वरूप खो चुकी सडक़ों की हालत देखकर लोग घुसने से भी घबराते हैं। रोजाना यहां सौ से अधिक भारी वाहन सामान लेकर आते है, पर उन्हे सुरक्षित बाहर निकालना मुश्किल हो रहा है। नालों का चैनल जुड़ा नहीं होने से फैक्ट्रियों में पानी भरा जाता है।

परेशान होकर गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने निगम को मिलने वाली मेंटेनेंस के लिए एक करोड़ की राशि रुकवाते हुए साफ-सफाई की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेते हुए व्यवस्था के लिए कर्मचारी लगा रखे हैं।

औद्योगिक क्षेत्र एक नजर-कुछ उद्योग: 1120-चालू हालत में-950-सडक़ों की लम्बाई-30 किलोमीटर-10 सेक्टरों मेंं विभाजित-2015 में सडक़, नाले का बजट स्वीकृत हुआ 100 करोड़ रुपए-लगभग 3 सेक्टरों में कांक्रीट की सडक़े बनी 30 करोड़ की लागत से-70 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत होने के बाद विकास नहीं हुआ।

1990 से औद्योगिक क्षेत्र की सडक़े नहीं बनी हैं। 2015 से 70 करोड़ से यहां सारी सडक़ों के विकास को लेकर बजट स्वीकृत है। अभी हालात यह है कि भारी वाहनों को निकालने के लिए कभी-कभी जेसीबी मशीन की जरूरत भी पड़ जाती है। हाल ही में शुरू हुए साढ़े सात करोड़ की लागत से सडक़ विकास से कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन सम्पूर्ण विकास फिर अधर में लटक जाएगा।
एसके पाली, अध्यक्ष, गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन

70 करोड़ की लागत से विकास तो होना है, लेकिन इसके लिए वर्तमान में शासन के पास बजट नहीं है, उसके लिए ऋण लेना पड़ेगा। वैसे जुलाई में हमने 7.5 करोड़ की लागत से उन स्थानों की सडक़ों का विकास करने का टेंडर निकाला था, जिसका कार्य शुरू हो चुका है। इससे बड़ी समस्या तो हल हो जाएगी।
अधिकारी अमरीश, महाप्रबंधक, जिला उद्योग

Published on:
06 Nov 2018 03:03 am