भोपाल

संविधान में संशोधन के बाद ही संभव है एक साथ चुनाव

सीईसी बोले- मतदाता सूचियों में फर्जीवाड़ा नहीं, हो रहा सत्यापन

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Apr 11, 2018

भोपाल। मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने मंगलवार को मतदाता सूची में फर्जीवाड़े से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण सतत प्रक्रिया है। इसमें निर्धारित पते पर न मिलने वाले, गुमनाम और मृतक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। प्रदेश में ऐसे सात लाख मतदाता मिले हैं। यह कुल मतदाताओं का करीब सवा एक प्रतिशत हैं। ऐसे नामों को फर्जी नहीं कहा जा सकता।
मतदाता पुनरीक्षण और चुनाव कार्य की समीक्षा करने आए रावत ने कहा, मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति के अलग-अलग स्थानों पर नाम होने से उनका चुनाव में गलत उपयोग नहीं हो सकता। आयोग का प्रयास होता है कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति का नाम सूची में जुड़ जाए। उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने के सवाल पर कहा कि इसके लिए संविधान में संशोधन की जरूरत है। इसके बाद ही ऐसा संभव है।

ईआरओ नेट का नया वर्जन 19 को लॉन्च
मुख्य चुनाव आयुक्त ने अफसरों से कहा कि चुनाव के दौरान सतर्क रहकर काम करें, जिससे गलतियों की गुंजाइश न रहे। राज्य की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सलीना सिंह ने ईआरओ नेट की दिक्कतों के बारे में बताया कि तो रावत ने कहा, इसका अपडेट वर्जन आ रहा है। अतिरिक्त चुनाव आयुक्त संदीप यादव ने बताया कि 19 अप्रैल को नया वर्जन लांच हो रहा है। रावत ने विभिन्न पार्टियों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। इस दौरान ज्यादातर ने चुनावी कार्य में पारदर्शिता के साथ मिसिंग, डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं की सूची दलों को उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

हटाए अफसर को फिर लगा सकती है सरकार
रावत का कहना है कि देश में अभी एेसा कानून नहीं है कि चुनाव आयोग किसी अफसर को हटाए तो सरकार चुनाव के बाद उसे वहां वापस पदस्थ नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि आयोग संविधान के तहत काम करता है। यदि उसे लगता है कि चुनाव में कोई अधिकारी-कर्मचारी गड़बड़ कर सकता है या वह निष्पक्ष चुनाव कराने में बाधक बन सकता है तो आयोग उसे हटा देता है। चुनाव के बाद सरकार को लगता है कि वह अफसर बेहतर है तो उसे वापस वहीं पदस्थ कर देती है। इस मामले में कानून बनाने को वालों को सोचना चाहिए कि क्या यह स्थिति ठीक है।

चुनाव के वक्त सोशल मीडिया की होगी निगरानी
रावत ने मीडिया से चर्चा में कहा कि आयोग सोशल मीडिया की निगरानी के लिए एजेंसियों की मदद लेगा। उन्होंने बताया कि आयोग ने एक सेल का गठन किया है, जो अभी से सोशल मीडिया के कंटेंट का अध्ययन कर रहा है। चुनाव के दौरान असर डालने वाली चीजों पर नजर रखी जाएगी। उन्होंने स्वीकार किया कि देश में 17 करोड़ से अधिक इंटरनेट यूजर्स ऐसे हैं जो सोशल प्लेटफार्म से जुड़े हुए हैं। चुनाव के दौरान उनकी निगरानी के लिए एक बड़े तंत्र की जरूरत होगी। इसके लिए देश की जांच एजेंसियों की मदद लिए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने जनसंपर्क विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी सुरेश तिवारी की वेबसाइट लॉन्च भी की।

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Published on:
11 Apr 2018 08:26 pm
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