
भोपाल. प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से निकाले गए आदेशों के अनुसार आवेदन 12 जून तक लेने के साथ 12 जून को होने वाली ऑनलाइन लॉटरी को अब 20 जून को निकालने का निर्णय ले लिया गया है। जानकारों के अनुसार इस आदेश को प्रदेश में उपलब्ध तीन लाख 58 हजार सीट्स के मुकाबले मात्र एक लाख आवेदन आने के कारण निकाला गया था, लेकिन आदेश निकलने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
आरटीई पोर्टल के अनुसार चार जून की स्थिति में मात्र एक लाख 13 हजार आवेदन ही प्राप्त हुए हैं। जानकारों का कहना है कि अधिकांश अभिभावक नामी स्कूलों में एडमिशन को वरीयता दे रहे हैं, जबकि शिक्षा विभाग ने योजना में हर तरह के निजी स्कूलों को शामिल कर रखा है जिसके चलते जहां बड़े स्कूलों की सभी सीट्स भर जा रही हैं वहीं गली-मोहल्ले में चलने वाले स्कूल खाली रह जा रहे हैं।
आरटीई के क्षेत्र में काम करने वाले एक्टिविस्ट राम पांडे बताते हैं, 2010 में जब शिक्षा का अधिकार कानून आया तब मैन्यूल एडमिशन होते थे। तब कोई स्कूल 50 सीटें दर्शाता था तो कोई 15 या 20 सीटें रिजर्व करता था, तब कई स्कूल एक ही विद्यार्थी का नाम शेयर भी कर लेते थे। लेकिन अब सब ऑनलाइन हो गया है। अब फर्जीवाड़ा नहीं किया जा सकता।
अब आधार और समग्र आईडी से आरटीई के विद्यार्थी को आसानी से ट्रेक किया जा सकता है, ऐसे में एक विद्यार्थी का एक ही जगह एडमिशन हो सकेगा और एक नाम पर तीन-तीन स्कूलों की ओर से प्रतिपूर्ति का फर्जीवाड़ा संभव नहीं रह गया है। अब सभी स्कूलों को ऑनलाइन रिजर्व सीटें बतानी पड़ रही है जिससे सीटों की संख्या बढ़ गई हैं। इसके चलते ही सीटों के अनुपात में आवेदन कम नजर आ रहे हैं।