भोपाल

भोपाल समेत प्रदेश की 400 पंचायतों के कचरे से बनेगा जैविक खाद, 15 लाख आएगा खर्च, बनाई जा रही डीपीआर

ओडीएफ हुआ प्रदेश, राजस्व वसूलने वाली ५ हजार से अधिक आबादी वाली पंचायतें पहले चरण में होंगी शामिल
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Updated: 2 Oct 2018, 4:16 PM IST
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7वीं पास चम्पालाल फैला रहे जैविक खाद की जागरूकता

भोपाल। राजधानी समेत सभी 51 जिले 2 अक्टूबर से शोचमुक्त (ओडीएफ) हो गए। अब स्वच्छ भारत मिशन के तहत शोचमुक्त बड़े जिलों की 5 हजार से अधिक आबादी वाली करीब 400 ग्राम पंचायतों में 15 से 20 लाख रुपए की लागत से जैविक खाद (नाडेफ) सुखता गड्ढा और कीचन गार्डन बनाया जाएगा।

भोपाल की खजूरी सडक़, दीपड़ी, झिरनिया, छान, बिलखिरिया, भानपुर, बरखेड़ा नाथू, आदमपुर छावनी, नीलबड़, नजीराबाद, गुनगा, बर्राई, आदमपुर छावनी व अचारपुरा सहित दो दर्जन ग्राम पंचायतों सहित प्रदेश की करीब 400 बड़ी पंचायतें शामिल होगी।

5 हजार से अधिक आबादी वाली पंचायतें और खुद नल-जल, अनुमतियां आदि से राजस्व (कराधन) की व्यवस्था कर रही हो, उन्हें कचरा प्रबंधन के पहले चरण में शामिल कर यहां से निकलने वाले कचरे से जैविक खाद बनाया जाएगा। चिह्नित हर पंचायत पर 15-20 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है।

22 जिलों की जानकारी पर हो रहा काम
स्वच्छ भारत मिशन प्रबंधन ने 22 जिलों की करीब 762 ग्राम पंचायतों में से 400 ऐसी पंचायतें चिह्नित की हैं जो 5 हजार से अधिक आबादी वाली है और राजस्व वसूली भी कर रही है।

कुछ पंचायतों की तो डीपीआर भी बना ली गई है। भोपाल 23, इंदौर की 29, रीवा की 7, उज्जैन की 19, शाजापुर की 21, मंदसौर की 12, सीहोर की 12, ग्वालियर, दतिया, जबलुपर सहित अन्य जिलों की पंचायतों का चयन किया गया है।

1 रुपया, एक दिन और एक घर
पंचायतों से कचरा उठाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन ने गाइड लाइन बनाई है। इसमें एक घर से एक दिन का एक रुपया लिया जाएगा। पंचायत ही घर-घर से कचरा उठवाएगी। इसे नाडेफ में डालकर जैविक खाद बनाया जाएगा।

फर्टिलाइजर पर ग्रामीणों की निर्भरता कम हो सके और कचरा का प्रबंध भी हो सके। हालांकि इस पर एक संश्य यह बना हुआ है कि शहरी क्षेत्र में कचरा प्रबंधन की माकूल व्यवस्था होने के बावजूद गंदगी पसरी रहती है, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में कचरा एकत्र करने की प्रक्रिया कितनी कारगर होगी यह तो समय आने के बाद ही पता चल पाएगा।

दो महीने में 28 जिलों ने किया कमाल
स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश में 2 अक्टूबर, 2019 तक हर घर में शोचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन 2 अक्टूबर, 2018 को ही यह लक्ष्य हासिल कर लिया गया।

इसमें सिंगरौली, सतना, भिंड, सिवनी, शहडोल, मंडला जैसे 28 जिलों की अहम भूमिका रही। इनका लक्ष्य दो महीने पहले बेहद पिछड़ा हुआ था,लेकिन अगस्त और सितंबर में पिछड़े सभी 28 जिलों का काम पूरा कर लिया गया है।

इनमें दो महीने पहले तक करीब 4 लाख शोचालय बनने थे, लेकिन 30 सितंबर, 2018 तक हर घर में शोचालय बना लिया गया है। अब देश में मप्र 26वां राज्य हो गया, जो ओडीएफ घोषित किया गया है।


ओडीएफ मुक्त होने के बाद हमारा नया लक्ष्य कचरा मुक्त करने का है। चिह्नित पंचायतों में यह कार्यक्रम लागू किया जाएगा। जल्द ही बड़ी पंचायतों में कचरा प्रबधंन के लिए काम शुरु कर दिया जाएगा। पहले चरण में उन पंचायतों को शामिल किया जा रहा है, जिनमें पहले से ही राजस्व वसूली की प्रक्रिया चल रही है। ताकि यहां लोगों को 1 रुपए देने में कोई समस्या न खड़ी हो।

सुधीर जैन, उपायुक्त, स्वच्छ भारत मिशन, मप्र

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