Ayushman Scheme in MP- आयुष्मान योजना पड़ताल: एंट्री लेवल एनएबीएच सर्टिफिकेट वाले निजी अस्पतालों को पहले मनमानी की छूट, अब फुल सर्टिफिकेट को लेकर सख्ती, 126 निजी अस्पतालों की संबद्धता पर कार्यकारी परिषद की बैठक में होगा अंतिम फैसला
Ayushman Scheme in MP- एमपी में मध्यप्रदेश आयुष्मान योजना में मरीजों से 'खेल' किया जा रहा है। ज्यादा पैसे लेने के लिए कई अस्पताल अनेक गड़बडिय़ां कर रहे हैं। यहां तक कि मरीजों को गलत श्रेणी में तक भर्ती कर रहे हैं। आयुष्मान योजना करीब साढ़े चार करोड़ लोगों की स्वास्थ्य रक्षा का सहारा है, लेकिन इसके तहत कई छोटे अस्पतालों को एंट्री लेवल एनएबीएच (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स) सर्टिफिकेट के आधार पर संबद्धता देकर मरीजों को लूटने की खुली छूट दी गई। हालांकि अब सख्ती दिखाई जा रही है। नियमानुसार इन्हें आयुष्मान योजना से संबद्धता के बाद एक साल में फाइनल सर्टिफिकेट लेना चाहिए, लेकिन नियमों का लाभ लेकर वे तीन साल तक एक्सटेंशन ले लेते हैं और आयुष्मान के तहत इलाज करते रहते हैं। हाल ही में अधिकारियों के निरीक्षण में ऐसे ही कई अस्पतालों में ज्यादा पैसे लेने के चक्कर में मरीजों को गलत श्रेणी में भर्ती करने, गंभीर बताकर आइसीयू में रखने, गलत पैकेज एवं क्लेम करने जैसी गड़बडिय़ां सामने आई हैं। इसके बाद भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में कई अस्पतालों की योजना से संबद्धता निलंबित की।
ज्ञात रहे एनएबीएच सर्टिफिकेट अस्पतालों में अच्छी व्यवस्थाओं और गुणवत्ता का प्रमाण होता है। एनएबीएच की टीम 500 से ज्यादा मापदंडों पर जांच करती है। मरीजों की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता, दवाओं की उपलब्धता, नर्सिंग स्टाफ, इमरजेंसी सेवाएं और सर्जरी प्रक्रिया, ऑपरेशन थिएटर, संक्रमण की स्थिति आदि की जांच शामिल होती हैं। इसके लिए अस्पतालों को सालाना फीस भी भरना होती है।
छोटे अस्पताल नियमों का लाभ उठाकर एक बार एनएबीएच का निरीक्षण कराकर एंट्री लेवल सर्टिफिकेट हासिल कर आयुष्मान की संबद्धता ले लेते हैं। जिस इलाज की उन्हें पात्रता नहीं होती है, वह भी ये अस्पताल करना शुरू कर देते हैं। डिस्चार्ज सर्टिफिकेट किसी दूसरी बीमारी का दे देते हैं। कई छोटे अस्पताल आयुष्मान का पैसा निकालने बिना जरूरत कई जांचें और आइसीयू, वेंटिलेटर आदि का उपयोग मरीजों पर कर रहे हैं, ताकि योजना से पैसा निकाला जा सके।
हाल ही में मप्र मेडिकल काउंसिल ने भी राजधानी के एक अस्पताल में ऐसी गड़बड़ी सामने आने पर चेतावनी दी थी। जिसकी पात्रता नहीं, उसका भी इलाज नोटिस दिए 126 अस्पतालों द्वारा एनएबीएच का फाइनल सर्टिफिकेट पेश नहीं करने के चलते संबद्धता खत्म करने के 15 दिन के नोटिस दिए गए हैं। हेल्थ कमिश्नर की अध्यक्षता में कार्यकारी परिषद की बैठक में एनएबीएच फुल सर्टिफिकेट देने वाले अस्पतालों की संबद्धता जारी रखी जाएगी। नहीं देने वालों को पोर्टल से हटा दिया जाएगा।
योजना से कई बड़े निजी अस्पताल किनारा करने लगे हैं। संचालकों का कहना है कि आयुष्मान पैकेज उनके तय पैकेज से बहुत कम हैं, इसलिए ऐसे निजी अस्पतालों ने नाममात्र के लिए कुछ तरह के प्रोसीजर की मान्यता ले रखी है। जटिल और बड़ी सर्जरी आयुष्मान में नहीं कर रहे। आयुष्मान वाले मरीजों को जनरल वार्ड में भर्ती किया जाता है। जीवनरक्षक उपकरणों की सुविधा भी नहीं दी जाती।
आयुष्मान मप्र के सीईओ डॉ. योगेश भरसट के अनुसार आयुष्मान के तहत मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने एनएबीएच को लेकर सख्ती की जा रही है। मरीजों की सुविधा को देखते हुए तुरंत इलाज भी बंद नहीं किया गया है, लेकिन कार्यकारी परिषद की बैठक में जिन निजी अस्पतालों के फुल एनएबीएच सर्टिफिकेट नहीं होंगे, उन्हें पोर्टल से ही हटा दिया जाएगा। एंट्री लेवल सर्टिफिकेट वाले अस्पतालों का भी निरीक्षण कर कार्रवाई की जा रही है।