क्या आप जानते हैं कुछ विशेष आरती भी आपके पितरों को आनंदित कर सकती हैं, जिससे वे खुश होकर आपको सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैैं...
भोपाल। पितृ पक्ष आज यानी मंगलवार से शुरू हो गए हैं। हर साल 15 दिनों के श्राद्ध इस बार 14 दिन ही हैं। इन 14 दिनों में नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है। मान्यता है कि इन दिनों में आपके पितृ किसी भी रूप में आपके घर आंगन में आ सकते हैं। इसलिए किसी का अनादर न करें। इन आदतों से आपके पितृ खुश होकर आपको खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं। पर क्या आप जानते हैं कुछ विशेष आरती भी आपके पितरों को आनंदित कर सकती हैं, जिससे वे खुश होकर आपको सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैैं।
जानें आरती क्यों जरूरी
श्राद्ध के इन दिनों में पितरों के तर्पण के लिए जहां विधि-विधान से पूजा अर्चना पितरों को संतुष्ट करती है, वहीं यदि आप इन पंद्रह दिनों में नियमित रूप से आरती करें, तो आप खुद में भी अद्भुत बदलाव महसूस करते हैं। ये इशारा है कि आपके पितरों का आशीर्वाद आपको मिल रहा है।
तन-मन की शांति
सुबह नित्य क्रियाओं के बाद स्नान के तुरंत बाद यदि आप पितरों की तस्वीर के समक्ष हाथ जोड़कर आरती का नियम बना लें, तो यह आदत आपको मानसिक शांति देगी। आप खुद को पहले से ज्यादा फिट महसूस करेंगे। घर में सुख-शांति के साथ ही सकारात्मकता का माहौल परिवार के हर सदस्य का जीवन सुखी कर देगा।
इंटरनेट पर लगभग सभी भाषाओं में पितर आरती उपलब्ध हैं। राजस्थानी, गुजराती और मराठी के अलावा हिन्दी में भी आपको ऐसी आरती मिल जाएंगी जिन्हें सुनकर ऐसा वातावरण बनेगा कि पितृ खुश जरूर खुश हो जाएंगे...
1.
जय जय पितर महाराज, मैं शरण पडय़ों हूँ थारी।
शरण पडय़ो हूँ थारी बाबा, शरण पडय़ो हूँ थारी।।
आप ही रक्षक आप ही दाता, आप ही खेवनहारे।
मैं मूरख हूँ कछु नहिं जाणूं, आप ही हो रखवारे।। जय।।
आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी, करने मेरी रखवारी।
हम सब जन हैं शरण आपकी, है ये अरज गुजारी।। जय।।
देश और परदेश सब जगह, आप ही करो सहाई।
काम पड़े पर नाम आपको, लगे बहुत सुखदाई।। जय।।
भक्त सभी हैं शरण आपकी, अपने सहित परिवार।
रक्षा करो आप ही सबकी, रटूँ मैं बारम्बार।। जय।।
2
पितरों का गीत रीति-रिवाज
छोटी सी बादली बिन बादल झड लगाइयो
ये बादली के कारण म्हारा सुखा समुन्दर भराइयो
ये समुन्द्रा के कारण म्हारा सकल पीतर नहाइयो
नहाया धोया म्हारा सकल पितर कपड़ा तो पहरो जी
सोलह हाथ पछेवड़ी हमारे पितरा न कपड़ा तो पहरो
पहरा तो ओढ़ा म्हारा सकल पितर भोजन करेंगे
बीज खरबूजा लाडुडा म्हारे पितरा न भोजन करवाओ
जिमां तो जूठा म्हारे पितरा न चलुए कराओ
नहाया तो धोया म्हारा मुरारी लाल पगा ए पड़ेगा जी,
नहाया तो धोया म्हारा सीताराम पगा ए पड़ेगा जी
अन्न-धन्न लक्ष्मी म्हारै अमित न देवो जी
अन्न-धन्न लक्ष्मी म्हारै अनूप न देवो जी
गोद जुडला बहू दीपा न देवो, गोद जुडला बहू संध्या न देवो
छोटी सी बादली बिन बादल झड लगाइयो जी
ये बादली के कारण म्हारा सुखा समुन्दर भराईयो