साइबर क्राइम : बदमाशों को दबोचने के लिए रोडमैप तैयार, 850 करोड़ रुपए खर्च कर 'धोखे' से निपटेगी मध्य प्रदेश की साइबर पुलिस।
भोपाल. साइबर क्राइम से निपटने के लिए मध्य प्रदेश साइबर सेल ने पांच साल का रोडमैप तैयार किया है। इस पर करीब 850 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पहले चरण की कार्ययोजना की सीमा दो साल तय की गई है। इसमें 160 करोड़ का बजट तय किया गया है। अभी राज्य साइबर सेल के मुख्यालय के साथ प्रदेश में चार जोनल कार्यालय भोपाल, जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर में हैं।
पहले चरण में चार और जगह सागर, रीवा, बालाघाट और चंबल क्षेत्र में जोनल कार्यालय शुरू करने की योजना है। वहीं, साइबर अपराध के बदलते स्वरूप और विशेषज्ञों की कमी को देखते हुए जिलास्तर पर भी कॉन्ट्रेक्ट पर 80 विशेषज्ञ रखे जाएंगे। ये मुख्यालय, जोनल कार्यालयों, ईओडब्ल्यू समेत अन्य जांच एजेंसियों को भी सेवाएं देंगे।
राज्य साइबर सेल के एडीजी योगेश देशमुख के अनुसार, साइबर अपराधों की शिकायत और कार्रवाई के लिए पोर्टल बनाया जाएगा। दूसरे चरण में डायल-100 की तर्ज पर क्विक रिस्पॉन्स टीम तैयार की जाएगी।
इनपर काम
कम्प्लेन मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) के जरिये फाइनेंशियल फ्रॉड की सूचना मिलते ही बैंक अकाउंट फ्रीज करने और सोशल मीडिया के अपराध में अकाउंट ब्लॉक किया जाएगा, ताकि नुकसान कम से कम हो।
अभी सालभर में 500 डिवाइस की जांच होती है, जिसे 2000 करेंगे। ग्वालियर, छिंदवाड़ा, रतलाम, उज्जैन, खरगोन, जबलपुर, बालाघाट, सागर, शहडोल, मुरैना, होशंगाबाद, रीवा और इंदौर में फॉरेंसिक लैब शुरू की गई हैं।
साइबर अपराधों की जांच के लिए आधुनिक 15 इन्वेस्टिगेशन टूल्स की खरीदी होगी। एसपी कार्यालयों को भी एडवांस्ड इन्वेस्टिगेशन टूल्स से लैस किया जाएगा।
पहले चरण में सौ थानों में साइबर डेस्क बनेगी। यहां जांच के लिए विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी।
52 फीसदी केस फाइनेंशियल धोखाधड़ी से जुड़े हैं, जबकि 21फीसदी मामले सोशल मीडिया फ्रॉड से जुड़े मिले हैं।
पत्रिका ने उठाया मुद्दा
अगस्त में पत्रिका ने साइबर अपराधों को लेकर अभियान चलाया था। इसके बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने डीजीपी को विस्तृत कार्ययोजना बनाने को कहा था। अब साइबर सेल ने कवायद शुरू की है।
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