
Bhopal news: राजस्थान के जोधपुर की 'ब्लू सिटी' वाली ऐतिहासिक पहचान की तर्ज पर मध्यप्रदेश के भोपाल में पुराने शहर को भी एक नया और विशिष्ट स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है। जल्द ही पुराने शहर के मकान और दुकानों के साइनबोर्ड एक ही रंग, आकार और डिजाइन में नजर आ सकते हैं। जिला प्रशासन ने इस संबंध में नगर एवं ग्राम निवेश विभाग (टीएंडसीपी) को एक औपचारिक प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य आने वाले नए मास्टर प्लान में इस व्यवस्था को अनिवार्य रूप से शामिल कर लागू करना है, ताकि क्षेत्र को विश्वस्तरीय 'हेरिटेज सिटी' के तौर पर पहचान दिलाई जा सके।
इससे पहले भोपाल के प्रसिद्ध नंबर-5 बाजार को भी एक समान साइनबोर्ड व्यवस्था से सजाने और व्यवस्थित करने की योजना सामने आई थी। वर्तमान में शासन की रीडेंसीफिकेशन पॉलिसी के तहत हाउसिंग बोर्ड इस
बाजार का कायाकल्प कर रहा है। यहां आवासीय और व्यावसायिक परिसरों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। उम्मीद जताई जा रही है कि निर्माण कार्य पूरा होते ही इस पूरे परिसर को समान रंग व साइनबोर्ड से नया लुक दिया जाएगा।
योजना का बजट तो पूरा खर्च हो गया, लेकिन काम आधे-अधूरे ही रह गए। आज भी चौक बाजार में बिजली के तारों का मकड़जाल जस का तस फैला हुआ है, जो शहर की सुंदरता पर दाग लगाता है।
मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2047 पर आपत्तियों ने 25 दिन में 1732 की संख्या पार कर ली है। मार्च 2020 में जारी ड्राफ्ट 2031 पर आई आपत्तियों से ये ज्यादा हो गई है। अब भी पांच दिन बाकी है और बुधवार से बल्क आपत्तियां आएंगी। शहर की 80 कॉलोनियों के निवासियों ने आपत्तियों के लिए एक कॉमन ड्राफ्ट तय किया है, जिसे अलग अलग नामों से जमा कराया जाएगा। इसे लेकर बीते तीन दिनों में अलग-अलग क्षेत्रों में बैठकें हो चुकी है।
ड्राफ्ट 2031 को रद्द करने के पीछे 5000 आपत्तियां बताई गई थी, लेकिन ये एक ही बार वाली आपत्तियां नहीं थी। अब तक जारी सभी ड्राफ्ट को मिलाकर आपत्तियां का आंकड़ा निकाला था। जबकि मौजूदा ड्राफ्ट पर महज 25 दिनों में 1732 आपत्ति आ चुकी है। बीते सालों में बने मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर ये पहली बार होगा, जब इतनी आपत्तियां दर्ज हुई।
ड्राफ्ट 2021: पहली बार में 1600 आपत्ति आई थी। इसे वापस ले लिया गया था।
ड्राफ्ट 2031: पहली बार में 1731 आपत्तियां आई थी। इसे रद्द कर दिया गया था।
ड्राफ्ट 2047: पहले 25 दिनों में 1732 आपत्तियां आ चुकी है। पांच दिन और आपत्ति के बाकी है।
पुराने शहर की ऐतिहासिक गलियों, पारंपरिक बाजारों और रियासतकालीन इमारतों के बीच फिलहाल अलग-अलग रंगों, आकारों और अटपटे डिजाइनों के बोर्ड लगे हुए हैं। इससे न केवल इलाके की सुंदरता प्रभावित होती है, बल्कि ऐतिहासिक धरोहरों का मूल दृश्य स्वरूप भी छिप जाता है। समान रंग और आकार के बोर्ड लगाने से पूरे बाजार और आवासीय क्षेत्र में एक लयबद्धता आएगी।
जिस प्रकार जोधपुर को उसके खास नीले रंग के मकानों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और पर्यटन का लाभ मिला है, ठीक उसी तरह भोपाल भी का पुराना शहर पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनेगा। तत्कालीन महापौर आलोक शर्मा के समय में चौक बाजार हेरिटेज सिटी के लिए काम शुरू किया था। तब पांच करोड़ रुपए से यहां चौक को 100 साल पुराने बाजार के तौर पर विकसित करने की योजना तय की थी। अंडरग्राउंड इलेक्ट्रिक बायरिंग के साथ लाल पत्थर लगाने जैसे काम करने थे, लेकिन आधे अधूरे काम हुए।