भोपाल

भोपाल में बढ़े हुए ‘बिजली बिल’ से मिलेगी राहत, 5 गुना ज्यादा होते ही मिलेगा ‘रेड अलर्ट’

Electricity bill: बिजली अफसर कार्यालय के चक्कर लगाए बिना बिल की जांच और निराकरण की स्थिति बनेगी। सॉफ्टवेयर तुरंत उस बिल को रोक देगा।
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Updated: 24 Jun 2026, 12:12 PM IST
Electricity bill: 6 महीनों के औसत बिल पर नजर रखी जाएगी (Photo Source - Patrika)
UPPCL ने बिजली की दरें घटाईं (फोटो- पत्रिका)

Power companies in bhopal: मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में अब बिजली कंपनियां रीडिंग में गड़बड़ी या तकनीकी खराबी के कारण उपभोक्ताओं को हजारों रुपए का बिल नहीं थमा पाएगी। बिजली के नए अधिनियम में बिजली कंपनियों के बिलिंग सॉफ्टवेयर में एक ऐसा सुरक्षा कवच है जो उपभोक्ता के पिछले 6 महीनों के औसत बिल पर नजर रखेगा। बिल औसत से पांच गुना ज्यादा हुआ तो सॉफ्टवेयर तुरंत उस बिल को रोक देगा। बिल पर एक 'सिस्टम फ्लैग' यानी रेड अलर्ट लग जाएगा।

इसलिए होगा फ्लैग...

फ्लैग लगने का मतलब है कि सिस्टम ने मान लिया है कि इस बिल में कोई गंभीर गड़बड़ी है। बिल को पहले जांच के दायरे में डाला जाएगा ताकि किसी भी आम नागरिक को अचानक से भारी-भरकम बिल का झटका न लगे। सॉफ्टवेयर द्वारा फ्लैग जारी किए जाने के बाद बिजली कंपनी के संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय है कि उसे 30 दिनों के भीतर निराकृत करें। यानी बिजली अफसर कार्यालय के चक्कर लगाए बिना बिल की जांच और निराकरण की स्थिति बनेगी। इस तरह के बिल को निराकृत करने अधिकारियों को मौके पर जाकर या मीटर की जांच करके यह पता लगाना होगा कि बिल वाकई सही है।

केंद्र-राज्य के तय नियमों को आयोग टैरिफ में शामिल करता है। कंपनियों को इनके तहत बदलाव के लिए भी निर्देश दिए जाते हैं। नए अधिनियम के तहत आयोग अपने क्षेत्राधिकार के तहत काम करेगा।- उमाकांत पांडा, सचिव, एमपीइआरसी

हर माह छह लाख बिल, 80 हजार असंतुष्ट

जिले में चार लाख स्मार्ट मीटर स्थापित हो गए हैं। दो लाख अभी लगना बाकी है। इन्हें नियमित तौर पर बिल मिलते हैं, लेकिन इनमें से 80 उपभोक्ता बिल से असंतुष्टि जताते हुए शिकायत करते हैं। मई में ही डेढ़ लाख उपभोक्ता पांच से 25 यूनिट अतिरिक्त खपत से सब्सिडी दायरे से बाहर हुए तो दस से बारह गुना ज्यादा बिल बन गए। कंपनियों को शिकायत की, जिसमें मीटर जांच के साथ ही बिल को लेकर समझाइश देना पड़ी

‘बिजली लोड’ की जांच करेगी कंपनी

बिजली का बढ़ता भार उपभोक्ताओं की जेब हल्की करेगा। कंपनी अब अपने चार लाख स्मार्ट मीटर से मिले डाटा के आधार पर उपभोक्ताओं के घर में बिजली के लोड की जांच शुरू करेगा। दरअसल हर उपभोक्ताओं को कनेक्शन के समय स्वीकृत लोड होता है। उपभोक्ताओं के मंजूर भार के अनुसार ही संबंधित क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था तय होती है।

यदि ऐसे में कोई उपभोक्तता इस भार से अधिक का उपयोग करता है तो उसके लिए अनुमति व तय शुल्क देना होता है। अधिकांश उपभोक्ता ऐसा नहीं करते। स्मार्ट मीटर से कंपनी के पास उपभोक्ताओं के स्वीकृत लोड व उपयोग किए जा रहे लोड की पूरी डिटेल आ गई है। कंपनी अब अतिरिक्त भार के लिए पेनाल्टी लगाने के साथ ही भार बढ़वाने की प्रक्रिया शुरू करेगी।

Updated on:
24 Jun 2026, 12:12 PM IST
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