सहकारिता विभाग ने भी की केवल कागजी कार्रवाई, माफिया से वापिस नहीं हो पाई जमीन, सदस्यों की जीवन भर की कमाई डूबी
भोपाल। राजधानी की कई हाउसिंग सोसायटीज में संचालकों ने कॉलोनाइजर्स से मिलीभगत कर या खुद बिल्डर बनकर सदस्यों के हिस्से की जमीन बेच दी। अब संचालक तो चांदी काट रहे हैं और आशियाने की आस में अपने जीवन भर की कमाई सोसायटी के पास जमा करने वाले सदस्य प्लॉट के लिए भटक रहे हैं।
बिना किसी अनुमति के बेच दी गई
करीब तीन दर्जन गृह निर्माण सहकारी समितियों की डेढ़ सौ एकड़ से अधिक जमीन उनके संचालकों ने गैर सदस्यों को बेच दी। इससे संचालकों ने करीब सौ करोड़ रूपए अपनी जेब में डाल लिए। सहकारिता विभाग की अनुमति के बिना सहकारी समिति की जमीन बेची नहीं जा सकती लेकिन खास बात यह है कि आधे से ज्यादा सोसायटीज की जमीन तो बिना किसी अनुमति के बेच दी गई।
माफिया अभी भी कार्रवाई से बचे हुए
कुछ जमीन अधिकारियों की मिलीभगत से अनुमति लेकर भी बेची गई हैं। यह अनुमतियां जारी करने वाले अधिकारियों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह जमीन बेचने वाले और उन्हें संरक्षण देने वाले माफिया अभी भी कार्रवाई से बचे हुए हैं।
राजधानी में हाउसिंग सोसायटी बनाकर भूमाफिया ने जमीन के जमकर फर्जीवाड़े किए। इसमें तत्कालीन सोसायटी अध्यक्ष और संचालकों ने अधिकारियों से मिलीभगत कर सोसायटीज की जमीन कॉलोनाइजर्स को बेच डाली या वे खुद ही कॉलोनाइजर बन गए। इससे सबसे ज्यादा नुकसान सोसायटी के सदस्यों को भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि सालों बाद भी सैकड़ों सदस्य ऐसे हैं जिन्हें न तो प्लॉट मिला है और न पैसा वापिस हुआ है। क्योंकि अब इन सोसायटीज के पास न तो जमीन उपलब्ध है और उनके खाते में पैसा बचा है।
सहकारिता विभाग ने भी गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रकरण दर्ज कराए लेकिन इससे अपनी पूरी कमाई जमा कराने वाले सदस्यों को अब तक कुछ भी नहीं मिला। फर्जीवाड़ा कर अपनी जेबें भरने वाले मजे कर रहे हैं और अपनी गाढ़ी कमाई लगाने वाले खाली हाथ बैठे हुए हैं। कलेक्टर की जनसुनवाई शुरू होने के बाद से अभी तक सबसे ज्यादा शिकायतें हाउसिंग सोसायटीज की ही पहुंची हैं।
संचालकों ने कमाए करोड़ों रूपए
सर्वधर्म गृह निर्माण सहकारी समिति के संचालकों ने वर्ष 2001 से 2007 के बीच बिल्डरों को दामखेड़ा और पीपलनेर की जमीन बेचकर सबसे ज्यादा कमाई की। सहकारिता विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार सर्वधर्म की जमीन बिना किसी अनुमति के गैर सदस्यों को बेचकर तत्कालीन संचालकों ने ढाई करोड़ रुपए कमाए। जबकि सोसायटी के लगभग 400 सदस्य अभी प्लॉट की आस में भटक रहे हैं।
जमीनें बिकने के बाद जागे
सहकारिता विभाग ने जमीन बेचने वाले पदाधिकारियों और क्रय करने वाले गैर सदस्यों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया है। इसके साथ रजिस्ट्री निरस्त कराने के लिए सिविल कोर्ट में प्रकरण लगाए गए हैं। इसके साथ श्रीराम सोसायटी की लाउखेड़ी में स्थित 3 जमीन वर्ष 2008 में बिल्डर को बेची गई। अलकापुरी सोसायटी की कटारा स्थित 6.55 एकड़ जमीन 65 लाख 50 हजार रुपए में बेच दी गई। इसी प्रकार गोपाल, गायत्री, हर्षनगर और मानव गृह निर्माण सहकारी समितियों की जमीन भी बिना अनुमति तत्कालीन संचालकों ने बेच दी।
कुछ मामलों में कोर्ट में लगाए प्रकरण
कई सोसायटियों की जमीन बेचने के बाद सहकारिता विभाग ने जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ सिविल कोर्ट में याचिका लगाई है। लेकिन विभाग ने सदस्यों को लाभ दिलाने की दिशा में अन्य कोई कदम नहीं उठाया। सदस्य अभी भी प्लॉट के लिए भटक रहे हैं। अलकापुरी, श्रीराम, श्री गणेश, शादाब सोसायटियों की जमीन बिकने के बाद उनकी रजिस्ट्री निरस्त कराने के लिए सिविल कोर्ट में याचिकाएं लगाई गई हैं।
शासन ने भोपाल जिले की गृह निर्माण सोसायटियों की जमीन बिकने के मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की थी। यह समिति भी जिले से पूरी जानकारियां मंगाकर चुप बैठ गई। समिति ने भी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की।
इन हाउसिंग सोसायटीज की जमीन बेची गई
हाउसिंग सोसायटी - रकबा एकड़ में
श्रीगणेश 4.70
कावेरी 4.03
न्यू वल्लभ 5.00
शादाब 12.00
सर्वधर्म 8.00
न्यू अभिषेक 6.40
कान्हा 8.00
अल्कापुरी 6.81
सिद्धार्थ 6.00
न्यू राजधानी 1.01
वेलकम 12
हेब्रोन 13.25
पंचम 5.80
मानव 3.58
सन्मति 11.35
वनवासी 3.07
दीवान 9.38
सिमरत 7.19
अगम 1.36
पारस 15 हजार वर्ग फीट
आनंद विहार 5.00
गांधी आदर्श 2.00
स्वास्तिक 10.00
न्यू कृषि नगर 0.79
अमृतपुरी 0.75
शारपेक्स 2.82
श्रीराम 3.00
लावण्य गुरुकुल 33000 वर्ग फीट
अर्पित 2.02
फैक्ट फाइल-
- जिले में कुल हाउसिंग सोसायटी- 468
- इतनी सोसायटियों की जमीन बेचने के मामले सामने आए- 37
- पदाधिकारियों ने जमीन बेचकर कमाए- लगभग 100 करोड़
- प्लॉट के लिए परेशान सदस्य- करीब 10 हजार
हाउसिंग सोसायटीज की जमीन बेचने वाले संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कुछ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। सोसायटीज की जो जमीन बेची गई उसमें से कितनी वापिस हुई यह मैं देखकर ही बता पाउंगा। जो शिकायतें आती हैं उनके आधार पर जांच और कार्रवाई की जाती है।
- विनोद कुमार सिंह, उपायुक्त सहकारिता भोपाल