भोपाल

शिवराज बोले- सहकारिता बनेगी प्रदेश का ग्रोथ-इंजन

---------------------- सहकारिता आंदोलन की तैयारी : सहकारिता के आगामी रोडमैप पर चर्चा------------------

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Aug 06, 2021
CM Shivraj Singh Chouhan Statement,

jitendra.chourasiya@भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सहकारिता हमारे संस्कार और संस्कृति में है। सबका कल्याण-सबकी भलाई की सोच ही सहकारिता है। कोरोना काल में सहकारिता से ही सेवा हुई। प्रदेश में सहकारिता के माध्यम से अर्थव्यवस्था का नवनिर्माण किया जाएगा। पर्यटन, डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन आदि विभिन्न क्षेत्रों में सहकारिता को मजबूत बनाया जाएगा। प्रदेश में सहकारिता ‘ग्रोथ का इंजन’ बनेगी।
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यह बात शिवराज ने शुक्रवार को राज्य मंत्रालय में सहकारिता आंदोलन की नई ऊर्जा, नई शक्ति और नए क्षितिज विषय पर कार्यशाला में कही। यहां शिवराज ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों ने सहकारिता का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया है। प्रदेश में इन्हें सशक्त बनाने के लिए 1400 करोड़ का बैंक कर्ज उपलब्ध कराया गया है। सहकारिता के माध्यम से अर्थव्यवस्था का नवनिर्माण हो रहा है। प्रदेश में उद्यानिकी फसलों का बहुत उत्पादन है। इसमें सहकारिता के जरिए फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देंगे। कार्यशाला में जब शिवराज को मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए आमंत्रित किया गया, तो उन्होंने कहा कि मैं विद्यार्थी हूँ मार्गदर्शनक नहीं। यहां सहाकरिता के बड़े-बड़ेे विशेषज्ञ हैं। कार्यशाला में सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया और राज्य योजना एवं नीति आयोग के उपाध्यक्ष प्रो. सचिन चतुर्वेदी भी विशेष तौर पर मौजूद रहे।
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किसने क्या कहा-
- आरबीआई सेंट्रल बोर्ड के निदेशक सतीश मराठे ने कहा कि अब सहकारिता क्षेत्र में पूंजी की आवश्यकता है। इसके लिए मौजूदा कानूनों में आवश्यक संशोधन करते हुए सहकारी संस्थाओं को अधिक अधिकार संपन्न बनाना आवश्यक है। किसानों की आय दोगुना करने में डेयरी क्षेत्र महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश में एनिमल सीड बनाने तथा खाद्य संस्करण की बड़ी संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश में तिलहन का अच्छा बाजार था। प्रदेश में तिलहन और दलहन का उत्पादन बढ़ाया जाना चाहिए।
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- कैम्पो के अध्यक्ष किशोर कुमार ने कहा कि सहकारिता फसलों के बाजार मूल्य गिरने पर भी उन्हें सपोर्ट प्रदान करती है। कर्नाटक राज्य में जब लहसुन के दाम गिरे तो सहकारी समितियों ने बड़ी मात्रा में अच्छे मूल्य पर लहसुन खरीदकर किसानों की सहायता की। यह सहकारिता की शक्ति है। खेती में सहकारिता को अपनाया जाना चाहिए।
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- अमूल के क्षेत्रीय निदेशक आरएस सोडी ने कहा कि सहकारिता उन छोटे-छोटे कार्य करने वाले, व्यवसाइयों, कामगारों के लिए है, जो अकेले कुछ नहीं कर सकते। वे साथ मिलकर बहुत अच्छा कार्य कर सकते हैं। इसमें पेशेवर लोगों की सहायता लेनी होगी। आधुनिक तकनीकी का भी उपयोग आवश्यक है। मार्केटिंग और ब्रान्डिंग पर भी ध्यान देना होगा।
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- सहकारिता विशेषज्ञ डीडी त्रिपाठी ने कहा कि किसानों को सहकारिता का प्रशिक्षण देकर उनके कृषक उत्पादन संगठन बनाए जा सकते हैं। स्व-सहायता समूहों एवं किसानों की सहकारी समितियों को कृषि उत्पाद प्रसंस्करण के लिए प्रोत्साहित किया जाए। सहकारिता के क्षेत्र में मानव संसाधन नीति भी बनानी होगी।
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- इंडियन कॉफी वर्कर्स कॉ-ऑपरेटिव सोसाइटी (इंडियन कॉफी हाउस) के एंटोनी ने कहा कि हमारी सहकारी संस्था का मुख्य उद्देश्य अधिकतम रोजगार देना है। मध्यप्रदेश में अभी हमारी 36 ब्रांच हैं। अब छोटे-छोटे शहरों में भी कॉफी हाउस खोले जा रहे हैं।
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- सहकारिता विशेषज्ञ प्रो. शशिका रवि और वाशिंगठन डीसी ने कहा कि मध्यप्रदेश में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता है। कृषि तकनीकी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। फसलों की प्रोसेसिंग भी की जाए।
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- सहकार भारती के प्रदेश अध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि जब धन, श्रम एवं बुद्धि तीनों शक्तियाँ एक साथ लगती हैं और इसका लाभ सभी में बंटता है, वही सहकारिता है। प्रदेश में श्रमिक सहकारी समितियों का गठन किया जाना चाहिए।
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Published on:
06 Aug 2021 09:22 pm
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