भोपाल

‘ज्यादा मत खाना…’ अरुण जेटली को ऐसे छेड़ते थे मोदीजी, शिवराज ने सुनाया दिलचस्प किस्सा

PM Modi untold stories- नई दिल्ली में मंगलवार को एमपी के पूर्व सीएम एवं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की किताब का विमोचन हुआ...। इसमें पीएम नरेंद्र मोदी के साथ ही कई नेताओं के दिलचस्प किस्से हैं...।

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May 26, 2026
नई दिल्ली में मंगलवार को शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक का विमोचन हुआ। फोटो -पत्रिका

Shivraj Singh Chouhan book- मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को अपनी नई किताब अपनापनः नरेंद्र मोदी के साथ मेरे अनुभव लांच कर दी। इस किताब में शिवराज सिंह चौहान ने कई दिलचस्प किस्से बताए हैं। शिवराज ने बताया कि भाजपा कार्यकर्ता पारंपरिक तरीके से काम करते रहे हैं। कई बार तकनीक का उपयोग करने की मानसिकता नहीं रही। शिवराज ने शुरुआती दौर में जब मोबाइल आए उस समय का किस्सा बताया। तब इसे फाइल स्टार कल्चर से जोड़कर देखा जाता था।

शिवराज सिंह चौहान की किताब मंगलवार को दिल्ली में लांच हो गई। इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इस किताब में भोपाल सहित कई कार्यक्रमों के भी किस्से शामिल हैं। विमोचन कार्यक्रम में शिवराज सिंह ने पीएम मोदी से जुड़ा एक मजेदार किस्सा सुनाया। जब नरेंद्र मोदी भाजपा के प्रभारी के रूप में मध्यप्रदेश आए थे, तब शिवराज सिंह राज्य इकाई में महासचिव थे। तभी चुनावी तैयारियों को लेकर एक बैठक थी। शिवराज ने आगे कहा कि इस दौरान जब मोदीजी ने पूछा कि किसके पास ई-मेल आईडी है, तो उस समय शायद ही किसी के पास इसका उत्तर था। सभी कार्यकर्ता एक दूसरे का चेहरा देखने लगे। तब एमपी के पूर्व सीएम स्वर्गीय बाबूलाल गौर ने मजाक में पूछा - नरेंद्र भाई, आप यह फीमेल-फीमेल क्या कह रहे हैं, इस फीमेल-ईमेल से क्या होगा। इस पर सब हंस पड़े थे।

शिवराज सिंह की किताब अपनापन का विमोचन मंगलवार 26 मई को नई दिल्ली स्थित भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार, एनएएससी काम्प्लेक्स, पूसा में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने पुस्तक का विमोचन किया।

मोदी जी से पहली मुलाकात

शिवराज की किताब में कई दिलचस्प किस्से हैं। उन्होंने किताब में लिखा है कि 1991 में, तब जब जम्मू-कश्मीर आतंकियों और अलगाववादियों का एक गढ़ बन चुका था। भारतीय जनता पार्टी ने यह तय किया कि वह तमिलनाडु के कन्याकुमारी से लेकर जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर तक भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशीजी के नेतृत्व में एक राष्ट्रीय एकता यात्रा निकालेगी। उस समय कश्मीर घाटी आतंकवादियों तथा अलगाववादियों की सुरक्षित शरणस्थली समझी जाती थी और लाल चौक को आतंकवादियों का मजबूत गढ़ माना जाता था। उन दिनों लाल चौक पर तिरंगा फहराना मुश्किल ही नहीं, असंभव सा प्रतीत होता था। ऐसे में यह तय हुआ कि भारतीय जनता पार्टी 1992 के गणतंत्र दिवस पर लाल चौक पर तिरंगा फहराएगी। यात्रा शुरू होने से पहले दिल्ली में 'एकता यात्रा' के विस्तृत कार्यक्रम के दौरान 21 नवंबर, 1991 को पहली बार मोदीजी से मेरी मुलाकात हुई थी।

जब मोदी जी ने भांप लिया था मन

2013 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मोदीजी को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया था। तय हुआ कि समारोह के बाद मैं जनसमूह को संबोधित करूंगा। तब तक मोदीजी की आगामी लोकसभा चुनावों (2014) के लिए भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में घोषणा हो चुकी थी। मैं संकोच कर रहा था कि मेरा भाषण तो है, लेकिन किसी और वरिष्ठ नेता का तो नहीं, खासकर हमारे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का। मेरी इस झिझक को मोदीजी ने तुरंत भांप लिया। उन्होंने बड़े स्नेह के साथ मुझसे कहा, 'आप चिंता न करें। मैं यहीं रुककर कार्यकर्ताओं से बात करूंगा।' यह कहकर वे मंच के नीचे प्रतीक्षालय में समारोह के समापन का इंतजार करने लगे-बिल्कुल आम कार्यकर्ताओं की तरह।

पिता के निधन पर पहला कॉल उन्हीं का आया

मुझे 2019 की एक और घटना याद आ रही है। जब मेरे पिता का निधन हुआ, तो सबसे पहला सांत्वना कॉल मोदीजी का आया था। वह कॉल केवल औपचारिकतावश नहीं थी, बल्कि उस कॉल पर मोदीजी की स्नेह वाली आवाज थी। उन्होंने पिताजी की बीमारी और उनके अंतिम समय के बारे में पूछा, साथ ही परिवार का ध्यान रखने को कहा। कुछ दिनों बाद जब मैं दिल्ली आया तो उन्होंने पूछा, “सबकुछ ठीक से हुआ ? आप ठीक हो ? परिवार कैसे संभाल रहा है?”

जब अरुण जेटली को छेड़ते हुए कहा ‘ज़्यादा मत ख़ाना’

हल्के-फुल्के पलों में भी मोदीजी का वही स्नेह झलकता है। मुझे याद है कि पार्टी की बैठकों के दौरान वे कभी-कभी अरुण जेटलीजी, जो खाने के शौकीन थे, के सामने से नाश्ते की प्लेट खींच लेते थे। हँसी-मजाक में वे उन्हें छेड़ते, 'ज्यादा मत खाना।' वहाँ भी गहरा स्नेह था। उन्हें न केवल हमारे राजनीतिक कार्यों में रुचि थी, बल्कि हमारे स्वास्थ्य की भी चिंता होती थी।

Updated on:
26 May 2026 02:07 pm
Published on:
26 May 2026 02:05 pm
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