कार्बन संचय बढ़ाने प्रदेश में बनेगी कमेटी, पौधरोपण, पौधों की कटाई पर अंकुश लगाने पर कमेटी करेगी काम
अशोक गौतम
भोपाल. प्रदेश में कार्बन संचय पर अब सरकार केन्द्र से के्रडिट लेगी। इसके लिए राज्य सरकार कमेटी बना रही है, इसमें सरकार और गैर सरकारी सदस्यों के अलावा वन पर्यावरण पर काम करने वाले एनजीओ भी होंगे। ये तय करेंगे कि कार्बन संचय क्षमता को बढ़ाने के लिए सरकार क्या उपाय करे। कार्बन क्लेम के लिए भी केन्द्र सरकार के पास प्रस्ताव भेजेगी। क्योंकि केन्द्र में भी कार्बन के संबंध में एक कमेटी बनेगी।इंडियन स्टेट ऑफ फारेस्ट रिपोर्ट के अनुसार मप्र में 588.727 मिलियन टन कार्बन संचय की क्षमता है।
सरकार तीन से चार सालों के अंदर प्रदेश में दो गुना कार्बन संचय का प्रयास कर रही है। कार्बन संचय करने की क्षमता बढ़ाने पर फोकस शहरी क्षेत्रों में होगा। कार्बन के्रडिट के संबंध में बनाई जा रही कमेटी का पौधरोपण से लेकर पेड़ काटने और उसकी क्षतिपूर्ति पर भी अपनी राय देगी। इसके अलावा किसानों को भी पौधरोपण और कार्बन क्रेडिट पर मिलने वाले लाभों के संबंध में जानकारी देगी और उन्हें उनका हक दिलाने पर काम करेगी।
शेयर ट्रेडिंग जैसे होगा कार्बन टे्रडिंग
कार्बन टे्रडिंग का काम शेयर मार्केट जैसे ही होगा। शेयर मार्केट में जिस तरह से काम होता है और शेयर ऊपर और नीचे जाता है उसी के अनुसार कार्बन की दरें होंगी। इसके लिए केन्द्र स्तर पर एक एक्सचेंज आफिस होगा। यह आफिस कार्बन संचय पर क्लेम करेगा। उन देशों से कार्बन संचय पर पैसे लेगा, जहां कार्बन संचय की कोई व्यवस्था नहीं है।
अरुणांचल प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा वन
देश में अरूणांचल प्रदेश के बाद मप्र में सबसे ज्यादा वन है। मप्र में कुल भूखंड का 23.57 फीसदी वन है। इससे मप्र को अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा कार्बन संचय के लिए प्रति वर्ष राशि मिलेगी।
कहां कितनी कार्बन संचय की क्षमता टन में
नार्दन हिल्स साउथ 698682
उमरिया 92.97
कैमोर, सतना 668446
सतपुड़ा साउथ, सिवनी 587852
होशंगाबाद 69.58
नार्थ बैतूल 86.29
वेस्ट बैतूल 110.99
विंध्य- रायसेन 651830
औबेदुल्लागंज 59.84
सीहोर 71.65
मालवा- धार 172006
नीमड़, झाबुआ, बाड़वानी 94082
झाबुआ 71.60
सेंधवा 78.62
साउथ पन्ना 75.51
श्योपुर 527154
शिवपुरी 67.76
कार्बन संचय पर अभी सरकार को बहुत बड़ा सेटप तैयार करना है। कार्बन जितना संचय होगा उससे उतनी ही ज्यादा राशि सरकार को मिलेगी। हालांकि बारिश कम होने और अंधाधुंध पेड़ों की कटाई से से कार्बन संचय की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जा रही है। कार्बन संचय से आम जनता, किसानों को भी फायदा मिलेगा, लेकिन इसके लिए सरकार को एक सिस्टम तैयार करना होगा।
आरएन सक्सेना, कार्बन विशेषज्ञ और पूर्व आईएफएस अधिकारी मप्र