
भोपाल। ग्रामीण पेयजल गुणवत्ता निगरानी में प्रदेशवार रैंकिंग में मप्र का 10 माह के अंदर पहले स्थान आ गया है, जो पहले आठवें स्थान पर था। यह रैंकिंग भारत सरकार के जल शक्ति विभाग द्वारा 25 नवम्बर को जारी की गई है। यह जानकारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला ने शुक्रवार पत्रकारों को दी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश से तहसील स्तर तक पिछले दस माह में किए गए सुधारों के चलते यह परिणाम समाने आए हैं। शुक्ला ने बताया कि देश में अच्छा काम करने वाली लैबोरेटरी की टॉपटेन सूची में मध्य प्रदेश की पांच जिला लैब के नाम शामिल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में विभाग की 155 लैब हैं।
जिनमें पेयजल की शुद्धता का परीक्षण किया जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे पेयजल के प्रति जागरुक बनें और सीमित शुल्क पर लैब से पानी का परीक्षण कराएं।उन्होंने जनता से अपील की कि वे पेयजल के प्रति जागरुक बनें और सीमित शुल्क पर लैब से पानी का परीक्षण कराएं। ताकि समय रहते सही जानकारी मिल सके और जरूरत पडऩे पर पानी बदला जा सके। शुक्ला ने कहा कि प्रदेश में राइट टू वॉटर की सुगबुगाहट शुरू होने से पहले ही लैबों के कामकाज में सुधार की जरूरत महसूस होने लगी थी।
बढ़ाई परीक्षण क्षमता
विभाग ने जिला और तहसील लैबों की परीक्षण क्षमता भी बढ़ा दी है। अब लैबों में प्रत्येक माह ३०० सेंपर जांच किए जा सकेंगे, जो पहले दो सौ सेंपल तक ही जांच कर करते थे।
खरीदे जाएंगे उपकरण
अब लैबों के लिए उपकरण और कैमिकल खरीदे जाएंगे। विभाग ने एलयूएन के माध्यम से कैमिकल, ग्लास वेयर की खरीदी प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं जैम के माध्यम से पीएच मीटर, स्पेक्टर फोटो मीटर, टर्विडिटी मीटर, लैब रेफरिजरेटर, ऑयन मीटर सहित अन्य उपकरण खरीदे जाएंगे। इनकी सहमति तकनीकि कमेटी देगी।
परीक्षण संख्या बढ़ाई
स्थिति में सुधार के लिए विभाग ने जिला और तहसील लैबों की परीक्षण क्षमता दो सौ से बढ़ाकर 300 सेंपल हर माह चैक करने की कर दी। वहीं बच्चों को प्रतियोगिता के माध्यम से पानी की महत्ता और विभाग के प्रयासों की जानकारी दी गई । जिसे दो माह में 40 जिलों में लागू किया गया।