भोपाल

रहे सावधान ! सामने आए स्वाइन फ्लू के 71 केस, वायरस पकड़ने वाली मशीन बंद, भोपाल से सैंपल जा रहे पूणे

Swine flul: स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच गांधी मेडिकल कॉलेज की 5 करोड़ रुपये की जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन चार साल से बंद पड़ी है, जिससे सैंपल एम्स भोपाल या पुणे भेजने पड़ रहे हैं।
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Sep 16, 2026
स्वाइन फ्लू, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
स्वाइन फ्लू, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

Bhopal news: एमपी में स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे है। संक्रमितों की संख्या 71 पहुंच चुकी है। ऐसे समय में वायरस के बदलते रूप और नए स्ट्रेन की पहचान जरूरी हैए लेकिन गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में वायरस की नब्ज पकड़ने वाली पांच करोड़ रुपए की जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन चार साल से बंद पड़ी है। इससे एक भी सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग नहीं हुई। अभी तक इस मशीन को स्थापित ही नहीं किया गया है। मजबूरी में स्वाइन फ्लू और दूसरे वायरस के नमूनों की जांच के के लिए एम्स भोपाल या पुणे भेजना पड़ रहा है। कोरोना काल में नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) ने वर्ष 2022 में जीएमसी को मशीन उपलब्ध कराई थी। इसे स्टेट वायरोलॉजी लैब में रखा गया है।

रिएजेंट और स्टाफ का खर्च बना अड़चन

मशीन चलाने के लिए रिएजेंट, कंज्यूमेबल, प्रशिक्षित स्टाफ और नियमित रखरखाव की जरूरत है। मशीन के संचालन पर सालाना 20 लाख रुपए खर्च हो सकते हैं। 90 सैंपल एक साथ चलाने पर 4-5 लाख रुपए तक खर्च आता है। प्रबंधन का तर्क है कि एक साथ पर्याप्त सैंपल नहीं मिलने पर जांच महंगी पड़ेगी। मशीन के लगातार 72 घंटे संचालन के लिए निर्बाध बिजली व्यवस्था और जीनोम डेटा का विश्लेषण करने वाले बायोइन्फॉर्मेटिक्स विशेषज्ञ भी जरूरी हैं।

बदलते वायरस की पहचान में उपयोगी

जीनोम सीक्वेंसिंग से वायरस में हुए आनुवंशिक बदलाव का पता चलता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कौन सा स्ट्रेन फैल रहा है और उसमें क्या बदलाव हुए हैं। महामारी की निगरानी और संक्रमण की रणनीति तय करने में भी यह महत्वपूर्ण है। जल्द शुरू कराने का दावाः जीएमसी डीन डॉ. कविता एन सिंह ने बताया कि मशीन की अथॉरिटी माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पास है और यह स्टेट वायरोलॉजी लैब में रखी है। इसके संचालन में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की मदद का प्रावधान है। रिएजेंट और कंज्यूमेबल की आपूर्ति में देरी के कारण मामला अटका है। उन्होंने कहा कि विभागाध्यक्ष से बात की गई।

बुजुर्गों में खतरा अधिक

बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में संक्रमण के गंभीर होने का खतरा अधिक रहता है। बता दें, भोपाल में एच-1 एन-1 से राम सिंह (80) की मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, संक्रमण के चलते उन्हें गंभीर रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम और एक्यूट रेस्पिरेटरी फेल्योर की समस्या हो गई थी। इसके अलावा बुजुर्ग पहले से ही हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित थे। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि स्थिति को देखते हुए अस्पतालों को अलर्ट कर दिया गया है।

Updated on:
16 Sept 2026 08:26 am
Published on:
16 Sept 2026 08:26 am