भोपाल

संगीत बहते पानी की तरह है, जो अपनी दिशा खुद ही तलाश लेता है

भारत भवन में दो दिवसीय समारोह 'अद्वितिया' का शुभारंभ, पहले दिन स्वरपीढ़ी में तीन पीढिय़ों के कलाकारों ने दी प्रस्तुति

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Mar 09, 2019
संगीत बहते पानी की तरह है, जो अपनी दिशा खुद ही तलाश लेता है

भोपाल। भारत भवन में शुक्रवार से महिला रचनात्मकता का समारोह 'अद्वितिया' की शुरुआत हुई। पहले दिन स्वरपीढ़ी में तीन पीढिय़ों के कलाकारों ने वायलिन वादन की प्रस्तुति दी। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत राग यमन में ख्याल पेश किया, जो विलबिंत एक ताल में निबद्ध थी। इसके बाद उन्होंने मध्य लय तीन ताल में ख्याल की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम को विस्तार देते हुए द्रुत तीन ताल में तराना पेश किया तो राग देश तीन ताल में मध्य लय की प्रस्तुति दी। उन्होंने वुमन्स डे के अवर पर खमाज में बनारस ठुमरी पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। राग भैरवी से उन्होंने प्रस्तुति को विराम दिया। तबला पर मुंबई के ईशान घोष ने संगत दी।

स्ट्रेसफुल लाइफ के कारण अब यूथ शास्त्रीय संगीत की ओर लौट रहा है
उन्होंने कहा कि संगीत में बड़ी ताकत होती है। यह बहते हुए पानी की तरह होता है जो अपनी दिशा खुद ही ढूंढ लेता है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शास्त्रीय संगीत को आजादी के बाद उस तरह से तवÓजो नहीं मिली, जिसका वह हकदार है। आजादी से पहले राजघरानों में यह गाया बजाया जाता था, लेकिन आजादी के बाद जब टीवी का दौर आया तो शास्त्रीय संगीत के विषय पर ध्यान नहीं दिया गया। शास्त्रीय संगीत का सही से प्रचार-प्रसार नहीं करने के कारण ही आज इसको सुनने वालों में कमी आ गई है। आज फ्यूजन के नाम पर कुछ भी पेश किया जा रहा है। हालांकि उनका मानना है कि स्ट्रेसफुल लाइफ के कारण अब यूथ शास्त्रीय संगीत की ओर लौट रहा है।

तीन वर्ष की आयु में शुरू हो जाती संगीत शिक्षा
पद्मभूषण डॉ. एन राजम ने अपनी बेटी संगीता शंकर और नातिन रागिनी शंकर और नंदिनी शंकर के साथ वायलिन वादन किया। डॉ. राजम का परिवार आठ पीढिय़ों से कला से जुड़ा है। पहली चार पीढ़ी वोकल से जुड़ी थी, उनके पिता ने वायलिन वादन की शुरुआत की। अब उनके परिवार में ये परंपरा बन गई है कि ब"ो के तीन वर्ष की आयु पूर्ण होते ही वायलिन सीखना शुरू कर दिया जाता है। अभी उनके परिवार के 12 सदस्य इससे जुड़े हैं। तीन पीढ़ी के ये कलाकार अब तक सैकड़ों प्रस्तुतियां दे चुके हैं। रागिनी मैकेनिकल इंजीनियर तो नंदिनी सीए है।

राग दरबारी कानड़ा सुनकर कोमा से बाहर आया पेशेंट
वर्ष 2018 की एक घटना के बारे में वे बताती हैं कि कोलकाता के सेठ सुखलाल करनानी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल में 21 साल की युवती कोमा में थी। डॉ. संदीप कुमार ने दिन में तीन बार वायलिन वादक डॉ. एन राजम के राग दरबारी कानड़ा को सुनने की सलाह दी। कुछ ही दिनों में पेशेंट कोमा से बाहर आ गया। जब मुझे ये बात पता चली तो मुझे काफी खुशी हुई। क्योंकि मेरे गुरु ओमकार नाथ ठाकुर भी संगीत थैरेपी से इलाज करते थे। उन्होंने कहा कि मैंने जिंदगी में काफी पैसा कमाया, कई अवॉर्ड जीते लेकिन कभी सोचा नहीं था कि मेरा वायलिन वादन किसी को एक नई जिंदगी दे सकता है।

गायिकी अंग को दिया नया मुकाम
उन्होंने बनारसी गायिकी अंग को वोकल से जोड़कर उसे नया मुकाम दिया। उन्होंने कहा कि जब मैं रियाज करती थी तो हमेशा सोचती थी कि इसे सही तरीके से नही बजाया जा रहा। मैंने गुरु को जब इस बारे में बताया तो वे भी काफी खुश हुए। अब जब भी इसे सुनती हूं तो खुशी होती है कि युवा पीढ़ी इसे आगे बढ़ा रही है।

Published on:
09 Mar 2019 09:06 am
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