पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए सरकारी बंगला छोडऩे को तैयार हैं।
भोपाल : पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगले खाली कराने को लेकर हाईकोर्ट के आए फैसले के बाद केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बुधवार को कहा कि वे फैसले का सम्मान करते हुए सरकारी बंगला छोडऩे को तैयार हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी ने कहा कि वे इस फैसले को चुनौती देने के लिए मुख्यमंत्री से आग्रह करेंगे। हाईकोर्ट ने मंगलवार को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों से एक माह में सरकारी बंगले खाली कराने का फैसला सुनाया था।
खाली कराएंगे बंगले
सूत्रों के अनुसार हाईकोर्ट के फैसले के अनुरूप सरकार पूर्व मुख्यमंत्रियों से एक माह में सरकारी बंगले खाली करवा सकती है। सरकार ने विधि विभाग के अफसरों से राय मशविरा किया। इसकी संभावना भी तलाशी कि क्या फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। अफसरों ने उत्तर प्रदेश केस का हवाला देते हुए ऐसा न करने की सलाह दी है। उन्होंने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने की संभावना कम है, बेहतर है बंगले खाली करवा लिए जाएं। इस बारे में अंतिम फैसला मुख्यमंत्री करेंगे।
इनके बंगले पर मौन
प्रदेश में दो या इससे अधिक सरकारी बंगले वाले 11 सांसदों और 5 मंत्रियों से सरकारी आवास खाली कराने को लेकर सरकार अभी मौन है। वर्तमान में विधायक बाबूलाल गौर के पास भी पूर्व मुख्यमंत्री स्तर का बंगला है, जबकि मंत्री सुरेंद्र पटवा ने पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के नाम पर आवंटित सरकारी बंगले पर कब्जा कर रखा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास भी दो बंगले हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने नियमों में संशोधन कर मुख्यमंत्री को दो बंगले रखने की पात्रता दी है।
किसने क्या कहा
उमा भारती ने ट्वीट किया कि हाईकोर्ट के सरकारी बंगले खाली कराने के निर्देश का हम सम्मान करते हैं तथा कोर्ट के द्वारा दी गई अवधि से पहले मैंने अपने सहयोगियों से वैकल्पिक व्यवस्था तलाश कर उसको तैयार करने का आग्रह किया है। पूर्व मुख्यमंंत्री कैलाश जोशी ने कहा, 40 साल बाद इस तरह से बंगला खाली कराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, मैं मुख्यमंत्री से बात कर सुप्रीम कोर्ट में अपील की बात करूंगा। कोई रास्ता नहीं निकला तो फैसला मानने के लिए तैयार हूं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा, सुंदरलाल पटवा ने जो नियम बनाए थे, वे ही चले आ रहे हंै। अदालत के आदेश का पालन करेंगे। सांसदों को बंगला दिया जाता है तो आवेदन दे देंगे कि सांसद कोटे से दिया जाए। नहीं मिलेगा तो सर्किट हाउस में रहेंगे।