
भोपाल। नोटबंदी को भले सालभर से ज्यादा समय हो गया है लेकिन कुछ लोगों पर इसका असर आज भी है। इनमें दूल्हे भी शामिल हैं। अगर नोटों के हार से तुलना करें तो इनके दाम कम हो गए। हार बनवाने के लिए ज्यादातर लोग छोटे नोटों के इस्तेमाल की बात कर रहे हैं। राजधानी के पुराना शहर में ऐसी कुछ दुकानों पर ये हालात देखने को मिल रहे हैं।
बदलते परिवेश में शादियों का रूप बदल गया है। पहले कई शादियों में दूल्हेराजा को नोटों की माला पहनाई जाती थी। लेकिन शहरी क्षेत्र में धीरे-धीरे अब ये चलन खत्म हो रहा है। जिले या ग्रामीण इलाकों में शादियों के दौरान कई जगहों पर अब भी ये चलन जारी है। इसमें फर्क केवल नोटों की संख्या और कीमत का आ गया। पुराने शहर में इस काम में जुड़ें दुकानदारों ने बताया कि पहले जहां कई लोग एक हजार और पांच सौ रुपए के नोटों की माला ज्यादा बनवाते थे उसकी बजाय अब सौ और दो सौ रुपए के नोटों को पसंद कर रहे हैं।
भोपाल में कुछ पुरानी शादी व निकाह में दूल्हा-दुल्हन के श्रंृगार में उपयोग होने वाले सामानों की दुकानों पर अभी से भीड़ दिखाई देने लगी है। देव उठनी ग्यारस के बाद से लोहा बाजार में जुमेराती गेट से लगी दुकानों पर दूल्हा-दुल्हन को विशेष रूप से पहनाए जाने वाले नोटों के हार तैयार ही नहीं हो रहे है, बल्कि दुकानों पर सजने भी लगे है।
सीजन पर ही होता है कारोबार
दुकानदार किशन के मुताबिक आमतौर पर हर कीमत के नोटो की माला पहले से बनाकर रखनी पड़ती है। इसके अलावा जैसी डिमांड होती है, उतने नोटों की माला कुछ ही देर में तैयार कर दे दी जाती है, बस समस्या तत्काल नए नोटों को तुरंत जमा करने की होती है। इन हारों के मेहनताने के रूप में इसमें लगने वाले नोटों के अलावा सौ से दो सौ रूपए ही लिए जाते हैं। यही वजह है कि शादियां शुरू होते ही कई लोग इसे खरीदकर ले जाते हंै।
धीरे-धीरे कम हो गईं दुकानें
पहले शहर में करीब ऐसी दस दुकानें थी जहां इस तरह से नोटों की मालाएं बनाई जाती थी। किशन के मुताबिक डिमांड घटने से कई दुकानें बंद हो गई। अब इस क्षेत्र में केवल दो दुकानें ही रह गई हैं। पहले जो इसमें लगे लोग अब दूसरा कारोबार करने लगे हैं। शादियों में जो नई डिमांड हो रही हैं उन चीजों के व्यापार से जुड़ रहे हैं।