
Barwaha - राजस्थान के दौसा में हुए बस हादसे में जिन 8 लोगों की मौत हुई उनमें ज्यादातर एमपी के हैं। हादसे में सीहोर के देवेंद्र सिंह जिंदा जल गए। वे पिता की अस्थियां विसर्जित कर हरिद्वार से वापस आ रहे थे। देवेंद्रसिंह 45 साल के थे। कुछ दिनों के अंतराल में दो मौतों से घर में मातम पसरा है। दौसा में झाबुआ के धर्मसिंह की भी मौत हुई। उन्होंने अपने दोस्त की बाहों में दम तोड़ा। इंदौर की दिव्या ने भी दौसा में हुए हादसे में अपने पति दीपक को खो दिया। मृतकों के परिजन उनकी याद में विलाप कर रहे हैं। बड़वाह के जितेंद्र पांडे अपनी पत्नी प्रियंका को याद कर फूट फूट कर रो पड़े। उन्होंने बताया कि
पत्नी मेरे सामने ही जिंदा जल गई, मैं उसे नहीं बचा सका।
अस्पताल में भर्ती घायलों, उनके परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों ने हादसे के बारे में बताते हुए कहा कि ऐसा भयावह मंजर हमने इससे पहले कभी भी नहीं देखा था। बस यात्रियों ने कहा कि फायर ब्रिगेड के देरी से पहुंचने के कारण कई जानें गईं। लोगों का कहना था कि दमकल की गाड़ियां यदि जल्द आ जातीं तो कुछ यात्रियों को बचाया जा सकता था। मुख्यमंत्री मोहन यादव और बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित अनेक राजनेताओं ने इस हादसे में मौतों पर दुख व्यक्त किया है।
बड़वाह निवासी जितेंद्र पांडे, पत्नी प्रियंका और बेटा भी इंदौर आ रही स्लीपर बस में सफर कर रहा था। वे हरिद्वार घूमने गए थे। हादसे में जितेंद्र की पत्नी प्रियंका की मौत हो गई। वे दस साल के बेटे को दिलासा देते रहे पर पत्नी को याद कर खुद रोने लगे।
जितेंद्र सिंह रोते हुए बोले कि मेरी पत्नी मेरे सामने जिंदा जल गई। लोगों से बहुत गुहार लगाई, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। जितेंद्र ने बताया कि पत्नी प्रियंका की सीट ड्राइवर के ठीक पीछे थी। वहां पर बच्चा भी सो रहा था। जैसे ही एक्सीडेंट हुआ, पत्नी सीट के नीचे फंस गई। मैंने उसे निकालने का खूब प्रयास किया लेकिन बचा नहीं पाया। उस दौरान बस में आग लग गई थी।
भूमि भौर पुत्री भारत भौर (20) इंदौर
निर्मला पत्नी चंद्रप्रकाश गुप्ता, इंदौर
प्रियंका पाण्डे पत्नी जितेन्द्र पाण्डे (35), बड़वाह, खरगोन दीपक पुत्र नन्नू तंवर (29), बड़वाह, खरगोन
देवेंद्र पुत्र नरपत सिंह (60), सीहोर
धर्मसिंह पुत्र गुलसिंह (31), झाबुआ
बस चालक रामावतार,
कुलदीप (परिचालक)
(सही पहचान डीएनए रिपोर्ट आने के बाद होगी)