
Finance Officials (वित्त के कई अफसरों को मलाईदार विभागों में बड़ी पोस्टिंग Photo Source- Patrika)
MP News :मध्य प्रदेश में दूसरे विभागों की फाइलों को कसौटी पर परखने वाले वित्त विभाग के 18 से ज्यादा अफसरों को मलाईदार विभागों में मूल पदों की तुलना में 1 से 2 रैंक बड़े पदों का जिम्मा दिया गया है। राज्य वित्त सेवा के इन अफसरों का मूल पद उप संचालक (डीडी) है तो कुछ संयुक्त संचालक (जेडी) है। इनमें से कई डीडी को जेडी और कुछ जेडी को अपर संचालक (एडिशनल डायरेक्टर) जैसे कैडर पदों पर बैठा दिया है।
कुछ अफसर ऐसे भी हैं, जिनका मूल पद जेडी और एडिशनल डायरेक्टर हैं, लेकिन उनसे एक से दो रैंक नीचे सहायक संचालक जैसे पदों पर काम लिया जा रहा है। इनमें से ज्यादातर अफसरों के तबादला आदेश जून में ही हुए हैं। मामला बाहर आने पर वित्त विभाग में हड़कंप मचा गया है।
नगरीय निकायों की आर्थिक हालत खराब है, जिसे दुरुस्त करने का जिम्मा संचालनालय नगरीय विकास का है। संचालनालय की वित्त शाखा में जेडी का पद स्वीकृत है, जहां वित्त सेवा के सौरभ तिवारी को पदस्थ किया है, जिनका मूल पद डीडी है। उधर वित्त सेवा के तरुण बडेरिया का मूल पद डीडी है, जिन्हें नगर निगम भोपाल में अपर आयुक्त वित्त बनाया है। यह पद जेडी स्तर का है।
एमपी सड़क विकास प्राधिकरण (एमपीआरडीसी) में राज्य वित्त सेवा के राजेश सिंह पवैया को मुख्य महाप्रबंधक वित्त बनाया है, मूल पद डीडी है। जबकि मुख्य महाप्रबंध वित्त का पद एडिशनल डायरेक्टर स्तर का है, जिस पर दो रैंक नीचे के डीडी को पदस्थ किया है। विक्रम झिरोलिया का मूल पद डीडी हैं, लेकिन पीआइयू में उन्हें जेडी के पद पर पदस्थ किया है। डेढ़ साल से कार्यरत हैं।
राज्य वित्त सेवा के अमन पस्तोर को मंडी बोर्ड में वित्तीय सलाहकार बनाकर भेजा है, जिनका मूल पद जेडी का है। वित्तीय सलाहकार का पद एडिशनल डायरेक्टर स्तर का होता है तो वित्त सेवा के रजनी शुक्ला को पीडब्ल्यूडी में जेडी बनाकर भेजा है, जबकि उनका मूल पद संचालक है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मप्र इकाई के चूनाभट्टी कार्यालय में मुमुल सिंह का मूल पद डीडी है, जिन्हें सहायक संचालक के पद पर पदस्थ कर लेखाधिकारी का काम लिया जा रहा है। ये मूल पद से एक रैंक नीचे का पद है। वित्त सेवा के अमित वर्मा मंत्रालय में वरिष्ठ लेखाधिकारी के पद पर थे, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग में लेखाधिकारी बनाया है। ये मूल पद से एक रैंक नीचे का पद है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक संकट के बीच सरकार ने फिजूलखर्ची पर कई तरह की बंदिशें लगाई हैं। ऐसे में वित्त का रोल अहम हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि, किसको कहां और कब पदस्थ किया जाना है, इसके लिए नियम है। जिसे तोड़ने का मतलब पारदर्शिता को संदेह में डालना है। नियमों के विपरीत पदस्थापनाओं को वापस नहीं किया तो अराजकता बढ़ेगी, मेहनती अफसरों का मनोबल गिरेगा।
Published on:
02 Jul 2026 07:34 am
