भोपाल

15 से 25 साल के यंगस्टर्स हो रहे ‘थायरॉयड’ का शिकार, लापरवाही पड़ेगी भारी

Health news: थायरॉयड के लक्षण बच्चों में ही दिखने लगते हैं, जो 18 वर्ष तक बीमारी का रूप ले लेते हैं।
2 min read
Feb 26, 2026
thyroid
thyroid (Photo Source - Patrika)

Health news: थायरॉयड अब एक सामान्य बीमारी नहीं रही। बुजुर्गों के साथ युवा भी शिकार हो रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 15 से 25 वर्ष के युवाओं में इस बीमारी का असर ज्यादा देखा जा रहा है और महामारी की तरह बढ़ भी रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय में हाइपोथायरॉयडिज्म (अल्प सक्रिय थायरॉयड) का विशेष उपचार शुरू किया गया है।

आयुष मंत्रालय और कॉलेज के संयुक्त प्रयास से स्थापित इस विशेषज्ञ ईकाई में प्रतिदिन 15 से 20 मरीज पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हाइपोथायरॉयडिज्म को समय रहते संतुलित नहीं किया गया तो मरीज ह्यदय रोग और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से पीड़ित हो सकते हैं।

क्या है हाइपोथायरॉडिज्म

एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्दन में स्थित थायरॉयड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन (टी3 और टी4) नहीं बनाती है, जिससे शरीर का चयापचय धीमा हो जाता है। यह थकान, वजन बढऩा, ठंड लगना और अवसाद जैसे लक्षण पैदा करता है। इसके उपचार में हार्मोन के स्तर को संतुलित किया जाता है।

बंद नहीं होगी, अंग्रेजी दवा

कॉलेज के प्राचार्य डॉ.एसके मिश्रा ने बताया, रोगियों को संपूर्ण उपचार दिया जा रहा है। खास बात यह है कि मरीजों की पुरानी दवाएं बंद नहीं की जातीं, बल्कि विशेषज्ञ की देखरेख में हो्योपैथी दवाओं, योग और विशेष डाइट चार्ट के जरिए उनकी जीवनशैली में सुधार किया जाता है। इलाज से पहले 'बॉडी कंपोजिशन एनालिसिस' के जरिए शरीर की पूरी जांच की जाती है।

कम उम्र में लक्षणों को पहचानना जरूरी

आजकल ज्यादातर युवाओं में मोटापा, बाल झडऩा और शारीरिक क्षमता में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। युवाओं में शारीरिक और मानसिक विकास बाधित होना, जबकि युवतियों में अनियमित माहवारी की समस्या जैसे मुख्य लक्षण हैं। ऐसी स्थिति में अगर इलाज न मिले तो मधुमेह और जोड़ों के दर्द का जोखिम बढ़ जाता है।

ये लक्षण न करें इग्नोर

  • थकान और कमजोरी
  • अचानक वजन बढ़ना
  • रूखी त्वचा और बाल
  • कब्ज
  • ठंड लगना
  • याददाश्त कमजोर होना
  • विकास में कमी

थायरॉयड के लक्षण बच्चों में ही दिखने लगते हैं, जो 18 वर्ष तक बीमारी का रूप ले लेते हैं। समय पर उपचार से हम आने वाली पीढ़ी को इसके अनुवांशिक प्रभाव से बचा सकते हैं। डॉ. जूही गुप्ता, नोडल अधिकारी

Published on:
26 Feb 2026 11:37 am