
बीजापुर. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर (Bijapur) के सिलगेर में हुई फायरिंग (Silger Firing Case) में मृत तीनों ग्रामीणों के शव को बुधवार को बीजापुर में पोस्टमार्टम के बाद उनके परिजनों को सौंप दिए गए। इनके पूर्व जिला मुख्यालय पहुंचकर ग्रामीणों ने पुलिस एवं प्रशासन पर निर्दोष ग्रामीणों को परेशान करने का आरोप लगाया और उनके गिरफ्तार साथियों की तत्काल रिहा करने की मांग की।
ग्रामीणों ने सरकार, पुलिस और प्रशासन को जमकर कोसा। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए उन्हें समझाइश देने कलेक्टर ने जिला पंचायत सभागार में बैठक आहूत की जिसमें कलेक्टर, एसपी सहित विधायक विक्रम मंडावी भी शामिल हुए। बैठक में ग्रामीणों ने अफसरों को जमकर खरी-खोटी सुनाई और सिलगेर कैम्प तत्काल हटाने की मांग दोहराई। साथ ही कहा कि जब तक कैम्प नहीं हटाया जाता तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
दोषी पुलिसकर्मियों को दंडित करने की मांग
इस मामले में पुलिस द्वारा की गई आठ ग्रामीणों की गिरफ्तारी को गलत बताते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। गोमेड निवासी कृष्णा कडती ने बताया कि सिलगेर में पुलिस की गोली का शिकार बने मृत कवासी भगत ( चुटवाही) सुग्गा मुरली (गुडेम )और उइका भीमा ( तिम्मापुरम) को निर्दोष बताते हुए इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों को दंडित करने की भी मांग की।
सिलगेर में 19 पुलिसकर्मी भी हुए घायल : आईजी
इस मामले में बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा है कि सिलगेर कैम्प में हुए हमले में 19 जवान घायल हुए है, जिनमें डीआरजी के 13 तथा सीआरपीएफ के 6 जवान शामिल है। इन सभी का इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि कैम्प के आस-पास पुलिस द्वारा की गई बेरिकेडिंग तोड़कर कैम्प में हमला करने वाले 8 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर मंगलवार को कार्यपालिक दंडाधिकारी के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल में भेज दिया गया है। इनमें मड़कम हूंगा,आयतु कुंजाम, मड़कम लकमा, कुड़ाम हूंगा, मुड़ाम देवा, माड़वी कोसा, पोडियामी पांडु, मड़कम रामे प्रमुख हैं।