बीकानेर

लापरवाही की हद: सात माह से थमे हैं 108 एम्बुलेंस के पहिये

लोगों को तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार की 108 एम्बुलेंस सेवा के पहिये नोखा शहर में पिछले सात माह से थमे हैं।

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एम्बुलेंस

एम.सी. गोयल/नोखा. गंभीर रोगियों व दुर्घटनाग्रस्त लोगों को तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार की 108 एम्बुलेंस सेवा के पहिये नोखा शहर में पिछले सात माह से थमे हैं। जबकि बीकानेर-अजमेर हाइवे-89 पर स्थित नोखा शहर के आस-पास सड़क दुर्घटनाएं होती रहती है। इससे भी बुरा हाल जननी सुरक्षा योजना की 104 एम्बुलेंस सेवा का है। प्रसव पीड़ा से छटपटाती प्रसूता के परिजन एम्बुलेंस मंगाने के लिए छाती कूट कर रह जाते हैं लेकिन एम्बूलेंस समय पर नहीं पहुंचती।

प्रसूता के परिजनों को मजबूरन प्राइवेट एम्बुलेंस अथवा सामान्य वाहन से अस्पताल की राह पकडऩी पड़ती है। इसमें प्रसूताओं की हालत बिगडऩे के मामले होने के बावजूद विभाग के स्तर पर कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। शुक्रवार को राजस्थान पत्रिका की पड़ताल में विभागीय लापरवाही की यह इंतिहा भरी स्थिति सामने आई है।

पड़ताल में यह भी सच सामने आया कि नोखा बागड़ी राजकीय अस्पताल की तरह पांचू अस्पताल की 108 एम्बुलेंस भी पिछले सात माह से ऑफ-रोड यानी उसका संचालन ठप है। जसरासर अस्पताल की 108 एम्बुलेंस भी पिछले दस दिनों से ऑफ-रोड है। जबकि इन दोनों सेवाओं के सुचारू संचालन एवं मॉनिटङ्क्षरग का दायित्व जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का है।

दरअसल जब से राज्य सरकार ने 108 व 104 एम्बुलेंस सेवा को एक निजी कम्पनी को सुपुर्द किया तभी से यह बदहाली चल रही है। भले ही विभाग यह दावा करे कि दोनों सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए कम्पनी को कई बार पत्र लिखे गए।

सेवा से ग्रामीणों का विश्वास उठा
पड़ताल में यह भी सामने आया कि जननी सुरक्षा योजना के तहत नोखा शहर के लिए 104 एम्बूलेंस अब तक आवंटित ही नहीं हुई। नोखा उपखंड में केवल जसरासर, कक्कू व जांगलू प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में यह एम्बुलेंस उपलब्ध है। नोखा शहर अथवा आसपास के अन्य गावों में प्रसूताओं को जरुरत पडऩे पर इन्हीं में से कोई एक एम्बुलेंस भेजने का दावा विभाग कर रहा है

लेकिन हकीकत यह सामने आई कि जननी सुरक्षा योजना की यह एम्बुलेंस सेवा ग्रामीणों का विश्वास खो चुकी है। पड़ताल में कई ग्रामीणों व भुगतभोगियों ने बताया कि एम्बुलेंस के लिए फोन करने पर कोई जवाब नहीं मिलता। दो-तीन घंटे के इंतजार के बाद प्राईवेट साधन से ही प्रसूता को अस्पताल लेकर पहुंचना पड़ता है।

कई बार लगा चुके गुहार
एम्बुलेंस सेवाओं को सुचारू करने के लिए ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी व मुख्य चिकित्सा अधिकारी को कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई ध्यान ही नहीं दे रहा। दस दिन पहले रोड़ा गांव की प्रसूता के परिजन एम्बुलेंस के लिए दो घंटे तक इंतजार करते रहे लेकिन गाड़ी नहीं आई। जननी सुरक्षा की एम्बुलेंस सेवा में गड़बड़ी की शिकायतें गांवों से हमारे सूचना केन्द्र में पहुंचती रहती है लेकिन सुधार नहीं हो रहा है।
रावताराम रोड़ा, आरटीआई कार्यकर्ता एवं प्रभारी सूचना केन्द्र नोखा

जरूरत पर अन्य केन्द्र से मंगवाई जाएगी
नोखा की आपातकालीन 108 एम्बुलेंस सेवा की गाड़ी खराब थी। मेरे ख्याल से अब ठीक हो जानी चाहिए। जननी सुरक्षा योजना में नोखा शहर को 104 सेवा की गाड़ी आवंटित नहीं है। जरुरत पडऩे पर अन्य केन्द्रों से गाड़ी उपलब्ध कराई जाती है।
देवेन्द्र चौधरी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बीकानेर

कम्पनी नहीं दे रही रेसपॉन्स
नोखा व पांचू की एक अप्रेल तथा जसरासर की 108 एम्बूलेंस करीब दस दिनों से ऑफ रोड है। एम्बूलेंस सेवा सुचारू करने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के माध्यम से कम्पनी को कई बार पत्र भेजे गए। लेकिन कोई रूचि नहीं दिखा रह है।
डा. श्याम बजाज, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी नोखा

Published on:
28 Oct 2017 01:24 pm