आज भी ऐसे लोग है। जिनको देखकर लगता है कि मानवता जिन्दा है। इसकी जीवंत मिसाल केसरदेसर जाटान के समाजसेवी व भामाशाह प्रयागचन्द चाण्डक है।
तेजरासर. आज भी ऐसे लोग है। जिनको देखकर लगता है कि मानवता जिन्दा है। इसकी जीवंत मिसाल केसरदेसर जाटान के समाजसेवी व भामाशाह प्रयागचन्द चाण्डक है। उनका मकसद मानव मात्र के प्रति सेवा व समर्पण है। इसको लेकर चांडक ने अब तक कई गरीब लड़कियों की शादी करवा चुके है। उनके पास जब भी कोई भी गरीब व्यक्ति जब फरियाद लेकर पहुंचता है तो ये तत्परता से उनकी मदद को आतुर रहते हैं।
गरीब लोगों की आर्थिक मदद के साथ लोगों की लाइलाज बमारियों का इलाज भी नि:शुल्क करवाते है। गांवों में समय समय पर नि:शुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन करवात हैं तथा ऐसे गरीब बच्चों की मदद करते है जो लेकिन पढ़ऩा चाहते है। उनकी पढ़ाई का सारा खर्च खुद ही उठाते है। समाजसेवी चांडक ने नापासर रोड, देशनोक रोड, गाढ़वाला रोड व अपने गांव की सड़कों पर कई जगह ठंडे पानी की प्याऊ बनाकर पुण्य का कार्य किया है। इन्होंने गांव में गोशाला भी बनवा रखी है। इसमें बीमार आवारा पशुओं को रखा जाता है।
साथ ही आस-पास की गोशालाओं में भी अपने स्तरव ग्रामीणों के सहयोग से चारे की व्यवस्था करवाते है। प्रयागचंद बाड़मेर में भी बाढ़ पीडि़तों को मदद पहुंचा चुके है। साथ ही इन्होंने सुनामी पीडि़त लोगों की भी मदद की थी। आज प्रयागचंद ने गांव में माहेश्वरी संस्था चलाते है। उन्होंने बताया कि अब तो गांव वाले भी सहयोग के लिए आगे आ रहे है। चाण्डक ने गांव की स्कूलों में आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध करवाई है।
ग्रामीण जुगलकिशोर चांडक, रामचंद्र कस्वां, मनोज पाण्डिया आदि ने बताया कि प्रयागचंद चांडक हर समस्या का त्वरित समाधान करते है। प्रयागचंद का कोलकाता में व्यापार है। अब इनका व्यापार बच्चे संभालते है। पहले समाजसेवा का बीड़ा खुद ही उठाया था। अब इनको लोगों का सहयोग भी मिल रहा है। इन्होंने आस-पास के गांवों में बड़ी संख्या में पौधे भी लगाए हैं।