
अवसर था श्री जुबली नागरी भंडार के स्थापना दिवस पर चल रहे महोत्सव में शास्त्रीय संगीत संध्या का। कलाकार ने राग पूरिया कल्याण में तील ताल में निबद्ध ख्याल 'बहुत दिन बीते अजहु ना आए मेरे श्यामÓ सुनाकर वाहा-वाही लूटी।
मोहन वीणा ने मोहा
कार्यक्रम में जयपुर के ही मोहन वीणा वादक डीएल शर्मा ने मध्य और द्रुत लय में राग चारुकेषी के स्वर मोहन वीणा पर छेड़े। सितार, सरोद व वीणा के समावेश से तैयार मोहन वीणा वादन की प्रस्तुति से ऐसा समां बांधा कि समय का पता नहीं चला। अंत में कलाकार ने पहाड़ी धुन सुनाकर कर माहौल में मिठास घोल दी।
इन्होंने भी दी प्रस्तुति
कार्यक्रम में बीकानेर के तबला वादक गुलाम हुसैन ने एकल तबला वादन से श्रोताओं से दाद बटोरी। इसके अलावा मोईन खां ने राग बिहाग व पुखराज शर्मा ने मांड गायन की प्रस्तुति दी। संस्थान की ओर से अतिथियों ने कलाकारों को शॉल, श्रीफल, सम्मान पत्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
इनकी रही भागीदारी
कार्यक्रम में श्री संगीत भारती के निदेशक डॉ. मुरारी शर्मा ने शास्त्रीय संगीत की विभिन्न धाराओं पर प्रकाश डाला। राजाराम स्वर्णकार, कमल रंगा, गिरीराज पारीक ने सम्मान पत्र पढ़ा। इस मौके पर अशफाक कादरी, विद्यासागर आचार्य, डॉ. नन्दकिशोर पुरोहित, डॉ. गिरिजाशंकर शर्मा, ओमप्रकाश सारस्वत, नन्दकिशोर सोलंकी, डॉ. असित, शिवाजी आहूजा, सहित गणमान्य लोग शामिल हुए।
ईश्वर साधन है शास्त्रीय संगीत- शर्मा
मोहन वीणा वादक डीएल शर्मा का कहना है कि शास्त्रीय संगीत की साधना ईश्वर आरधाना, साधना से कम नहीं है। मंगलवार को प्रस्तुति देने बीकानेर आए शर्मा ने बताया कि आज देश में शास्त्रीय संगीत का महौल अच्छा बन रहा है। सोशल मीडिया से भी काफी हद तक असर पड़ा है।
ख्यातनाम कलाकारों के गायन, वाद्य सुनने का मौका आज सोशल मीडिया के जरिए हर किसी को मिल रहा है। पदमश्री पंडित विश्व मोहन भट्ट से मोहन वीणा वादन की बारीकियां सीख चुके शर्मा प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं।
महज स्टार बनाते हैं रियलिटी शो- वशिष्ठ
जयपुर के युवा शास्त्रीय गायक सौरभ वशिष्ठ ने कहा है कि आजकल टीवी पर रियलिटी शो चल रहे हैं। ये महज चंद दिनों के लिए स्टार तो बना सकते हैं, लेकिन शास्त्रीय संगीत की समझ के लिए गुरु-शिष्य परम्परा का निर्वाह जरूरी है। बिना गुरु के शास्त्रीय संगीत की बारीकियां कैसे सीख पाएंगे।
'राजस्थान पत्रिकाÓ से बातचीत में 20 वर्षीय सौरभ ने कहा कि आज के युवा भले ही कुछ भी गाएं, लेकिन भारतीय शास्त्रीय संगीत की तालीम जरूर हासिल करें। पंडित कुंदनमल शर्मा से शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सीख रहे वशिष्ठ ग्वालियर घराने से ताल्लुक रखते है। उन्हें सूर नूर और मलौडी ऑफ डेजर्ट के खिताब से नवाजा जा चुका है।