
बीकानेर. एक माह की नहरबंदी समाप्त होने के बाद अब पांच मई से किसानों को सिंचाई का पानी मिलेगा। नहर विभाग के अनुसार ६२० आरडी से पानी छोड़ा जाएगा और चार में से दो समूह में पानी दिया जाएगा। विभाग ने नहरी पानी का कार्यक्रम जारी कर दिया है। नहर विभाग के अनुसार पानी सुबह छह बजे दिया छोड़ा जाएगा। अब खरीफ की फसल की बुआई शुरू होनी है। खासकर कपास और नरमा की बुआई के लिए उपयुक्त समय है। जानकारों की मानें तो बीकानेर जिले में ८० प्रतिशत से ज्यादा कृषि भूमि वर्षा जल पर निर्भर है। करीब २.१५ लाख हैक्टेयर में खेती सिंचाई पर आधारित है। इसमें नहरी व नलकूप से पानी लिया जाता है। गौरतलब है कि नहरबंदी २६ मार्च से २३ अप्रेल तक रही थी। इस दौरान मुख्य इंदिरा गांधी नहर में मरम्मत का कार्य हुआ था। नहरबंदी समाप्त होने के बाद २९ अप्रेल को बीकानेर जिले में पीने का पानी छोड़ा गया था।
१२ लाख हैक्टेयर भूमि कृषि योग्य
जिले में बीकानेर, लणूकनसर, छत्तरगढ़, खाजूवाला, बज्जू, पूगल में खेती नहरी पानी पर आधारित है। वर्तमान में किसान कपास व नरमा की बुआई कर सकते हैं। इन फसलों की बुआई का समय १५ मई तक है। कृषि जानकारों के अनुसार जिले में १२ लाख हैक्टेयर भूमि कृषि योग्य है। इसमें ४८०० हैक्टेयर में खरीफ की बुआई की जा रही है। इन दिनों कीट व बीमारियांे के प्रकोप को देखते नरमा-कपास की खेती की तरफ किसानों का रुझान रहता है। कृषि वैज्ञानिक इंद्र मोहन वर्मा के अनुसार किसान देशी कपास, हाईब्रिड नरमा, बीटी किस्म आदि की बुआई कर सकते हैं। यह फसल १७५ दिनों मंे पककर तैयार हो जाती है।
अब खेती के लिए पानी
जिले में पीने का पानी पहले छोड़ दिया गया था। अब पांच मई से खेती के लिए पानी दिया जाएगा। इसके लिए ६२० आरडी से पानी छोड़ा जाएगा।
विनोद मित्तल, मुख्य अभियंता (हनुमानगढ़ उत्तर)