
नोखा. नोखा-सीकर रेल मार्ग की मांग लंबे समय से की जा रही है। चार जिलों के लोगों की यह आस कब पूरी होगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा। रेल मंत्रालय द्वारा नोखा से सीकर तक रेल मार्ग का विस्तार करने के लिए पूर्व में फरवरी 1994 में सर्वे भी हो गया था। लेकिन किन्हीं कारणों से यह कार्य फाइलों में कैद हो गया। इसके बाद वर्ष 2009-10 में पूर्व में हुए सर्वे को पुन: अपडेट करने की स्वीकृति जारी किए जाने के बाद सर्वे अपडेट किया गया। 12 मार्च 2012को रेलवे बोर्ड को भेजी गई इस रिपोर्ट के मुताबिक बनने वाले प्रस्तावित रेल मार्ग की दूरी 209 किलोमीटर होगी। रेल मार्ग के निर्माण में कुल 819.11 करोड़ रूपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया।
रेलवे बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति के लिए 17 मई 2012को योजना आयोग को भेजा। इसके बाद क्या कार्रवाई हुई इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी अब तक नहीं मिली। ऐसे में राजनीतिक उदासीनता के चलते इतना लंबा समय गुजर जाने के बाद भी रेलमार्ग की स्वीकृति नहीं मिल पाई। इसके लिए चार जिलों बीकानेर , नागौर, चुरू, सीकर के लोग रेलमार्ग की स्वीकृति मिलने की बाट जो रहे हैं।
बीकानेर सांसद अर्जुनराम मेघवाल और नागौर के सांसद सीआर चौधरी के केन्द्र सरकार में मंत्री बनने के बाद यहां के लोगों को रेलमार्ग स्वीकृत होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिलने से निराशा ही हाथ लगी। सितबंर 2016 में नोखा आए केन्द्रीय मंत्री मेघवाल ने इस रेल मार्ग को जल्दी ही स्वीकृत करवाने की बात कही थी। जून २०१७ में सरदारशहर-रतनगढ रेल मार्ग का उद्घाटन करने पहुंचे रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने नोखा के भाजपा पार्षद जगदीश भार्गव द्वारा रेलमार्ग स्वीकृत करने की मांग किए जाने पर स्वीकृति का आश्वासन दिया था पर सिवाय आश्वासन के अब तक कुछ नहीं मिला।
इन्हंे मिलेगा फायदा
नोखा-सीकर रेलमार्ग बनने से नोखा सहित चार जिलों बीकानेर, नागौर, चूरू, सीकर के लोग लाभान्वित होंगे। वहीं मुकाम में लगने वाले गुरू जंभेश्वर भगवान के मेले में भी लाखों दर्शनार्थियों को भी इसका लाभ मिलेगा। साथ ही नोखा से लेकर हिमटसर, काकड़ा, जसरासर, कातर, सांडवा, बीदासर, सुजानगढ़, लाडनंू, लक्ष्मणगढ़, सालासर सहित आस-पास के ग्रामीणों को रेलमार्ग से जयपुर जाने में आसानी रहेगी व समय की भी बचत होगी। रेलवे की आय में भी इजाफा होगा।