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कृषि विश्वविद्यालय की कार्यशाला में उर्वरक, मृदा परीक्षण पर चर्चा

फसलों में संतुलित पोषण के लिए डीएपी के बजाय एन पी के (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश) ग्रेड्स उर्वरक अधिक उपयुक्त है।
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बीकानेर

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Brijesh Singh

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Updated: 31 Oct 2026, 9:04 PM IST

कृषि विश्वविद्यालय की कार्यशाला में उर्वरक, मृदा परीक्षण पर चर्चा

कृषि विश्वविद्यालय की कार्यशाला में उर्वरक, मृदा परीक्षण पर चर्चा

स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान केंद्र में शुक्रवार को मासिक तकनीकी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार) हिरेन्द्र शर्मा व कृषि अनुसंधान केंद्र के क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक प्रतिनिधि डॉ. एस पी सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुई। अतिरिक्त निदेशक कृषि शर्मा ने बताया कि एसएसपी फाॅस्फोरस युक्त उर्वरक है, जिसमें 16 प्रतिशत फाॅस्फोरस एवं 11 प्रतिशत सल्फर पाया जाता है। इसमें उपलब्ध सल्फर के कारण यह उर्वरक तिलहन एवं दलहन फसलों के लिये अन्य उर्वरकों की अपेक्षा अधिक लाभदायक होता है।

शर्मा ने कहा कि एसएसपी के साथ यूरिया का उपयोग कर फसल बुवाई के समय आवश्यक नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं सल्फर पोषक तत्वों की पूर्ति कम लागत में ही आसानी से की जा सकती है। फसलों में संतुलित पोषण के लिए डीएपी के बजाय एन पी के (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश) ग्रेड्स उर्वरक अधिक उपयुक्त है। मृदा की उर्वरा क्षमता बनाये रखने एवं फसल का समुचित उत्पादन लेने हेतु मृदा परीक्षण के आधार पर की गई अनुशंषा एवं फसल अवस्था अनुसार उपयुक्त ग्रेड के एन पी के उर्वरक का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने विभागीय योजनाओं में शत प्रतिशत प्रगति अर्जित करने के निर्देश दिए। कृषि गुण नियंत्रण अभियान के तहत कृषि आदान निरीक्षकों को शत् प्रतिशत नमूना आहरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान अक्टूबर माह की कृषि क्रियाओं की प्रगति की समीक्षा की गई तथा नवम्बर में कृषकों द्वारा की जाने वाली कृषि व उद्यानिकी तकनीकी पर चर्चा की गई।