
देश में जैन समाज में 89 प्रतिशत लोग पढ़े लिखे हैं। जैन समाज ने समर्पण और सेवा भावना से काम किया है।
समाज का अपना एक स्तर है। बच्चों को प्रारंभ से ही सेवा और समर्पण से काम करने की सीख दी जाती है।
प्रतिभावान बच्चे देश और समाज की समर्पण भाव से सेवा करें। तभी देश में जैन समाज का श्रेष्ठ होने का दर्जा कायम रहेगा।
यह आव्हान जैन महासभा की ओर से रविवार को आशीर्वाद भवन में जैन प्रतिभा सम्मान समारोह में वक्ताओं ने एक स्वर में किया। इस मौके पर 55 प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर नारायण चौपड़ा ने कहा कि जैन समाज में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। बच्चों को बड़े ओहदों पर जाने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है।
बड़े सरकारी पदों और तकनीकी सेवाओं में क्यों नहीं जा रहे हैं? जैन समाज को अल्पसंख्यक घोषित किया गया है। मेडिकल कॉलेज खोलकर इसमें 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के प्रावधान में प्रतिभावान बच्चों को मौका दिया जाए।
विशिष्ट अतिथि बिक्री कर उपायुक्त हेमन्त जैन ने कहा कि देश में अन्य समाजों की ऐसी प्रतिभाएं भी है जिनको जीवन भर सम्मान नहीं मिलता। जैन समाज की प्रतिभाओं का सम्मान हो रहा है यह बड़ी बात है।
महासभा के टोडरमल ललवाणी ने कहा कि इन प्रतिभाओं से सभी बच्चे प्रेरणा लें और विविध क्षेत्रों में आगे बढ़ें।
इस अवसर पर इद्रमल सुराणा, प्रो. पीसी तातेड़, जतन लाल दुग्गड़, लूणकरनसर छाजेड़ ने विचार रखे। मेघराज सेठिया ने महापौर को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।