बीकानेर

मैदानों का अभाव, टूर्नामेंट घटे, स्थायी कोच नहीं, महंगी डाइट और सीमित अवसर

स्थिति यह है कि कई खिलाड़ी मजबूरी में मिट्टी वाले मैदानों पर अभ्यास करते हैं, जहां चोट लगने का खतरा हमेशा बना रहता है।जिन मैदानों पर फुटबॉल की गतिविधियां होनी चाहिए, वहां कई बार अन्य आयोजनों को प्राथमिकता दी जाती है।
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Jul 03, 2026
फाइल फोटो
फाइल फोटो

फुटबॉल के प्रति जुनून तो है, लेकिन सुविधाओं के अभाव ने बीकानेर के खिलाड़ियों के हौसलों को मानो 'रेड कार्ड' दिखा दिया है। शहर में प्रतिभाओं की कमी नहीं, मगर बुनियादी खेल ढांचे की कमजोर स्थिति उनके सपनों की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। अभ्यास के लिए उपयुक्त मैदान नहीं हैं। स्थायी कोच का अभाव है। स्थानीय स्तर पर टूर्नामेंट कम हो गए हैं और महंगी डाइट का खर्च भी खिलाड़ियों की राह मुश्किल बना रहा है। स्थिति यह है कि कई खिलाड़ी मजबूरी में मिट्टी वाले मैदानों पर अभ्यास करते हैं, जहां चोट लगने का खतरा हमेशा बना रहता है।जिन मैदानों पर फुटबॉल की गतिविधियां होनी चाहिए, वहां कई बार अन्य आयोजनों को प्राथमिकता दी जाती है। इससे नियमित अभ्यास प्रभावित होता है और खिलाड़ियों की तैयारी भी अधूरी रह जाती है। खिलाड़ियों का कहना है कि स्थानीय प्रतियोगिताओं की संख्या लगातार घटने से प्रतिभा को निखारने और चयनकर्ताओं के सामने खुद को साबित करने के अवसर भी सीमित हो गए हैं। उनका मानना है कि अधिक टूर्नामेंट होंगे, तो नई प्रतिभाओं को पहचान मिलेगी और खिलाड़ियों का प्रतिस्पर्धात्मक स्तर भी बेहतर होगा।

डाइट का खर्च भी बड़ी चुनौती
फुटबॉल खिलाड़ी भैरूरतन ओझा बताते हैं कि फुटबॉल में उपकरणों पर भले अधिक खर्च नहीं होता, लेकिन एक खिलाड़ी की संतुलित डाइट पर प्रतिदिन करीब 400 से 500 रुपए खर्च हो जाते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह राशि जुटाना आसान नहीं होता, जिसके कारण कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी बीच में ही खेल छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।

मैदान नहीं तो अभ्यास कहां करें?
फुटबॉल खिलाड़ी राजेंद्र सिंह का कहना है कि जब पर्याप्त मैदान ही उपलब्ध नहीं होंगे, तो खिलाड़ी अभ्यास कहां करेंगे। जिन मैदानों पर फुटबॉल खेली जानी चाहिए, वहां अन्य कार्यक्रम आयोजित होने से खेल गतिविधियां प्रभावित होती हैं। इसका सीधा असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ता है।

स्थानीय टूर्नामेंट बढ़ें, तो निखरेगी प्रतिभा
खिलाड़ी राहुल ओझा का कहना है कि प्रतियोगिताओं की कमी के कारण खिलाड़ियों को मैच एक्सपोजर नहीं मिल पाता। वहीं यशवर्धन राजपुरोहित के अनुसार बड़ी प्रतियोगिताओं में खेलने का अवसर तो मिलता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर नियमित टूर्नामेंट आयोजित हों तो खिलाड़ियों को अधिक लाभ होगा। इससे नई प्रतिभाओं को मंच मिलेगा और भविष्य के लिए मजबूत खिलाड़ी तैयार हो सकेंगे।

Published on:
03 Jul 2026 06:11 pm