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Bikaner: 56 ग्राम सोना, 6 गोल्ड लोन और 25 लाख की हेराफेरी,’मनी लॉन्ड्रिंग’ के नए पैटर्न का खुलासा

Gold Loan Scam: साइबर अपराधियों ने अब ठगी की रकम को छिपाने और वैध बनाने का नया तरीका खोज लिया था। गोल्ड लोन को माध्यम बनाकर करोड़ों रुपए की साइबर ठगी की राशि को बैंकिंग सिस्टम में कानूनी लेनदेन का रूप दिया जा रहा था।
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Gold Loan Scam: साइबर अपराधियों ने अब ठगी की रकम को छिपाने और वैध बनाने का नया तरीका खोज लिया था। गोल्ड लोन को माध्यम बनाकर करोड़ों रुपए की साइबर ठगी की राशि को बैंकिंग सिस्टम में कानूनी लेनदेन का रूप दिया जा रहा था। बीकानेर साइबर थाना पुलिस ने ऐसे ही एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि साइबर ठगी की रकम को गोल्ड लोन के जरिए 'मनी लॉन्ड्रिंग' करने का यह देश का पहला सामने आया मामला है।

56 ग्राम सोने पर छह बार लिया लोन, 25 लाख की रकम की हेराफेरी

पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ने बताया कि बज्जू के मिठड़िया निवासी सुनील ज्याणी (35) पुत्र रोशनलाल बिश्नोई को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने 56 ग्राम सोने पर 6 बार गोल्ड लोन लेकर साइबर ठगी से प्राप्त करीब 25 लाख रुपए अपने बैंक खाते में प्राप्त किए। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक स्विफ्ट कार और तीन महंगे मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जांच में सामने आया कि आरोपी साझेदारी में बीकानेर शहर में छह और कोलायत क्षेत्र में चार शराब की दुकानें संचालित करता है। इसके लिए 'मातेश्वरी' नाम से फर्म का बैंक खाता खुलवा रखा था। पुलिस के अनुसार साइबर ठगी की रकम इसी खाते में भी प्राप्त की जाती थी।

ऐसे काम करता था नया नेटवर्क

गिरोह पहले साइबर ठगी कर पीड़ितों से रकम हासिल करता था। इसके बाद रकम सीधे सामान्य बैंक खाते में जमा करने के बजाय ऑनलाइन गोल्ड लोन खाते में जमा कर दी जाती थी। पूरी प्रक्रिया में ठगी की रकम से गोल्ड लोन की किस्त (री-पेमेंट) जमा की जाती। इसके बाद गिरवी रखा सोना छुड़ाया जाता या दोबारा लोन लिया जाता। नई लोन राशि वैध बैंक खाते में आ जाती।

इस तरह ठगी की रकम बैंकिंग सिस्टम में वैध लेनदेन जैसी दिखाई देने लगती और खाते फ्रीज होने से पहले ही रकम सुरक्षित निकल जाती। पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हैं। उस पर छत्तीसगढ़ में निवेश के नाम पर करीब पांच लाख रुपए की ठगी तथा एक बुजुर्ग महिला को डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर करीब 1.50 करोड़ रुपए ठगने का भी आरोप है।

तकनीकी जांच से खुला राज

मुखबिर से सूचना मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। जांच में साइबर ठगी की रकम गोल्ड लोन खातों में जमा होने का पैटर्न सामने आया। इसके बाद संबंधित वित्तीय संस्थानों और बैंकों से रिकॉर्ड जुटाकर कार्रवाई की गई और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस अधीक्षक ने लोगों से अपील की है कि किसी के कहने या लालच में आकर अपने नाम से बैंक खाता या गोल्ड लोन खाता उपलब्ध नहीं कराएं। साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।